Saturday, 26 September 2020
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बीकानेर में बड़े पैमाने पर चल रहा अवैध कब्जों का खेल

न रोक, न कार्रवाई

बीकानेर। महानगर की तर्ज पर विकास कर रहे बीकानेर में  वर्ष-दर-वर्ष आसमान छू रही जमीन की कीमतो से एक बार फिर भू-माफियो की \'काली नजर\' पड़ चुकी है। कुछ समय पहले कार्रवाई के नाम पर हुई खानापूर्ति की असलियत भू-माफिया गिरोह व अवैध कब्जे करने व बेचने वाले लोगो को समझ मे आ चुकी है। यही कारण है कि कुछ समय के सन्नाटे के बाद एक बार फिर भू-माफियां सक्रिय हो गये । मजे कि बात यह है कि चाहे कोई भी सरकार हो या कैसा मगर भू-माफियाओं के खिलाफ कड़ा कदम उठाने की हि मत किसी ने नहीं दिखाई है। जानकारों की मानें तो बीकानेर में बड़े पैमाने अवैध कब्जों के कारोबार में भू-माफियाओं के साथ स्थानीय नेता और पुलिस-प्रशासन के अफसर भी मिले हुए हैं और पिस रहा है बेचारा गरीब, जिस को वाकई में छत की जरूरत है लेकिन वह छोटा सा भूखंड पाने में भी सफल नही हो पा रहा है। एक बार फिर सक्रिय हुए इन भू-माफियो ने अपने नापाक इरादो को अंजाम देने के लिए चुनाव से ठीक पहले का समय चुना है। यही कारण है कि बीकानेर में  आए दिन अवैध कब्जो व अतिक्रमणो के मामले सामने आ रहे हैं और कई बार झगड़े तक की नौबत आ रही है, लेकिन निराशाजनक यह है कि सब कुछ जानते हुए भी पुलिस और प्रशासन के जि ोदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। 

यह है  बीकानेर  का सूरते हाल 

 जमीनो के दामो मे आए उछाल के बाद अब बीकानेर  का सूरते हाल यह है कि शहरी सीमा से सटा क्षेत्र हो, भीतरी भागों के मार्ग हो या फिर सरकारी जमीन, कोई भी अतिक्रमियो व भू-माफियो की नजर से अछूते नहीं हैं। करोड़ों की बेशकीमती जमीन पर अवैध कब्जों का सिलसिला सतत रूप से चलता ही जा रहा है। शहर की जमीन पर भू-माफियो व अतिक्रमियो की काली नजर से आम आदमी बेहद मायूस है। मजे कि बात यह है कि  अवैध कब्जाधारियो को हतोत्साहित करने के नाम पर केवल \'हवाई चेतावनी देकर प्रशासनिक तंत्र की ओर से अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली जाती है।  केवल कागजो मे चेतावनी
प्रशासन ने रसूखदार व प्रभावी अतिक्रमियों के अवैध कब्जों को हटाने के लिए अभी तक कोई साहस ही नहीं दिखाया है। हकीकत यह है कि केवल कागजों में चेतावनी देने की कार्यवाही हो रही है, जो अतिक्रमियों के बुलंद हौंसलों को हतोत्साहित करने में नाकाफी साबित हो रही है। 
न रोक, न कार्रवाई 
कच्ची बस्ती में कब्जों के नियमन को लेकर चल रही रस्सा-कस्सी के बीच दिन-ब-दिन अतिक्रमण पर अतिक्रमण हो रहे हैं। बावजूद इसके उन्हें रोकने के लिए कोई ठोस कार्रवाई देखने को नहीं मिल रही है।  शासन -प्रशासन के साथ नगर  निगम और नगर विकास न्यास  की ओर से सरकारी जमीन पर अतिक्रमण रोकने के लिए बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत इससे जुदा है। जहां देखो वहां अतिक्रमणों की बाढ़ आई हुई है। 
 

 

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