Monday, 23 October 2017

निराश्रित पशुओं को गोचर भूमि में छोडऩे का विरोध

गौ-अभ्यारण्य संभाग स्तर पर खोला जाए

बीकानेर । बीकानेर के आसापास की तहसीलों के निराश्रित पशुओं को शहर व गोचर भूमियों में जबरन छोडऩे का राष्ट्रीय गाय आन्दोलन से जुड़े संगठनों ने विरोध किया है। संवाददाता सम्मेलन में इस कार्यवाही के विरूद्व जनतांत्रिक तरीके से आन्दोलन चलाने की बात भी कही गई। शहर नथाणिया के बृजरतन किराडू ने  बताया कि जिला प्रशासन द्वारा कुछ समय पहले शहरी क्षेत्र में रह रहे निराश्रित गौवंशो के समाधान के लिए अभियान चलाया उसमें गोचर व गौशाला संचालकों ने भी सहयोग किया। पशु छोडऩे में सरकार अव्वल रही लेकिन सुविधा के नाम पर कोई भी सकरात्मक कार्य नहीं किया गया। इसके चलते गोचर भूमि में रहने वाले पशुओं के चारे पानी का संकट इससे और अधिक गहरा गया है। गोचर से निकले पशु राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। उन्होनें कहा कि जिले की तहसीलों के लोग जबरन आवारा गोधन को गोचर में छोड़ जाते है। गांवों में स्थापित गोचर पर प्रभावशाली लोगों का अतिक्रमण होने के कारण वे निराश्रित को चरने नहीं देते। प्रशासन को चाहिये की वे ग्रामीण स्तर पर गौधन के रहने,खाने और चिकित्सकीय सुविधा मुहैया करवायें ताकि निराश्रित गौवंश शहरी क्षेत्रों में आने से रूके और उनके जीवन की रक्षा की जा सके। इसके बाद  रानीबाजार स्थित गो सेवा संघ कार्यालय में आन्दोलन से जुड़े संगठनों के पदाधिकारियों की बैठक हुई। बैठक में शरह नथानिया गोचर भूमि में ग्रामीण क्षेत्रों से छोड़े जाने वाले आवारा पशुओं के राष्ट्रीय राजमार्ग पर असमय काल के ग्रास बनने पर चिंता जताई। आन्दोलन के संयोजक सूरजमालसिंह नीमराना ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र की औरण, पायतान व अन्य भूमियों पर भू-माफिया कब्जा कर रहे हैं। इसके चलते पशुओं को ग्रामीण क्षेत्र में रखने और उनके चारे पानी के प्रबंध की बड़ी समस्या खड़ी होने लगी है। ऐसे में ग्रामीण मजबूरन पशुओं को शहरी क्षेत्र की और पलायन करवाने पर विवश हैं जिससे यह समस्या और ज्यादा बलवत हो रही है। इस पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन से सहयोग की मांग की जानी चाहिए। बलदेवदास भादाणी ने कहा कि निराश्रित गोवंश की समस्या से गौवंश की तस्करी में बढ़ोतरी हो रही है। इसलिए निराश्रित गौवंशों की समस्या का स्थायी व कारगर समाधान गौ-अभ्यारण्य संभाग स्तर पर खोला जाए, निराश्रित गोवंशों को रखकर उसकी सही उपयोगिता ली जा सकेगी। बैठक में राष्ट्रीय गाय आन्दोलन से जुड़े लखुराम गहलोत, रघुनाथसिंह, अशोक ऊभा, शहर नथानिया गोचर समिति के अमित जांगिड़, गौ अभ्यारण्य संयुक्त समिति के अश्विन वरेनिया, गोपालसिंह राजपुरोहित, उदयरामसर गोचर समिति के रघुवीर महाराज, गौग्राम स्वावल बन संस्थान के भवानीशंकर शर्मा, तुलसीराम प्रजापत, कपिल गौशाला एवं संवर्धन के प्रेमसिंह, अनूप गहलोत तथा मां भारती सेवा प्रन्यास के शिशपालगिरी गोस्वामी ने भी अपने विचार रख गाय को प्रशासनिक सहयोग प्रदान करने की बात कही। गोचर भूमि में पशुओं की देखभाल के लिए पशु चिकित्सक की नियुक्ति करने और उनके लिए चारा पानी का प्रबंध करने के साथ शहरी क्षेत्र में रहने के आदी हो चुके पशुओं के लिए चारदीवारी का निर्माण कर बाड़ाबंदी करने की मांग राज्य सरकार से करने का विचार प्रकट किया। इस पर सभी गो भक्तों ने सहमति प्रकट करते हुए जल्द ही जिला प्रशासन से मिलकर इस संबंध में नई रणनीति बनाकर कार्य करने की बात कही।
 

Destitute animals