Friday, 20 October 2017

बीकानेर अधिवक्ताओं ने मनाया संविधन दिवस

संविधान मंे नीति निदेशक तत्वों की प्रासंगिकता विषय पर संगोष्ठी

 बीकानेर, आज अधिवक्ता परिषद्, की बीकानेर ईकाई की ओर से संविधान दिवस पर ‘‘संविधान मंे नीति निदेशक तत्वों की प्रासंगिकता‘‘ विषय पर संगोष्ठी नये न्यायालय परिसर के काॅन्फ्रेन्स हाॅल में आयोजित की गई। 


कार्यक्रम के अध्यक्ष बीकानेर बार के वायोवृद्ध अधिवक्ता  सच्चिदानन्द आचार्य, मुख्य अतिथि अपर जिला एंव सत्र न्यायाधीश   तनवीर चैधरी, मुख्य वक्ता प्रोफेसर अशोक प्रेम सेठिया, विशिष्ट अतिथि बार ऐसोशिएशन बीकानेर के उपाध्यक्ष   अवनीश हर्ष थे। 
 कार्यक्रम में सर्वप्रथम भारत के संविधान की प्रस्तावना पर माल्यापर्ण किया गया उसके बाद एडवोकेट राधेश्याम सेवग ने संविधान की प्रस्तावना पढी।  
मुख्यवक्ता प्रोफेसर अशेाक प्रेम सेठिया ने अपने उदबोधन में सर्वप्रथम संविधान पर बोलते हुए कहा कि भारत का संविधान 2 साल 11 माह 18 दिन में 11 मिटींगों में बन कर तैयार हुआ है लेकिन हालांकि इसको बनाने वाली समिति को आमजन के द्वारा चुनी हुई नही थी फिर भी भारत के नागरीकों के द्वारा इसको आत्मसात किया गया। 
Bikaner Advocates during conferee on Constitution Day
वरीष्ठ अधिवक्ता रामकिशनदास गुप्ता ने संविधान विशेषज्ञ के रूप में बोलते हुए कहा कि भारत के संविधान की विशेषता उसकी प्रस्तावना में है जिसमें कहा किया गया है कि ये संविधान व्यक्ति की गरीमा को बनाये रखने के लिए है अर्थात नागरीक नही कोई भी व्यक्ति जो भारत में हो उसकी गरीमा की रक्षा इस संविधान के द्वारा की जायेगी चाहे वह किसी अन्य देश का नागरीक ही क्यो ना हो। इससे संविधान निर्माताओं की विराट सोच का पता चलता है जो यह बताना चाहते थे कि भारत राज्य केवल नागरीकों की नही बल्कि व्यक्ति की गरीमा बनाये रखने के लिए प्रतिबद्ध है। 

मुख्य अतिथि तनवीर चैधरी ने अपने वक्तव्य में कहा कि सबको समान और त्वरीत न्याय एंव निशुल्क विधिक सहायता मिले यह भारत के अनुच्छेद 39 क में कहा गया है। जो कि नीतिनिदेशक तत्वों का भाग है। इस सम्बन्ध में न्यायपालिका और सरकारें जोर शोर से कार्य कर रही है और विधिक चेतना भी फैला रही है। इस तरह कहा जा सकता है कि नीति निदेशक तत्व केवल दिखावा नही होकर धरातल पर है। 
कार्यक्रम में इसके बाद विशिष्ट अतिथि अवनीश हर्ष एवं कार्यक्रम अध्यक्ष एडवोकेट   सच्चिदानन्द ने नीति निदेशक तत्वों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हालाकिं ये न्यायपालिका से प्रवर्तनीय नही है यानी लागू नही करवाये जा सकते लेकिन फिर भी न्यायपालिका गाहे बगाहे कार्यपालिका एंव संसद को इस सम्बन्ध में कार्य करने के सलाह देती रही है।  इसका प्रत्यक्ष उदाहरण समान नागरीक संहिता लागू करने के सम्बन्ध दिया गया निर्णय है।   अधिवक्ता परिषद की बीकानेर ईकाई के अध्यक्ष एडवोकेट दामोदर शर्मा ने सभी अतिथियों एंव आगन्तुकों का धन्यवाद दिया। 
बीकानेर बार के वरिष्ठ अधिवक्ता गणेश चैधरी, कुलदीप शर्मा, जगदीश शर्मा, मोहनसिंह, रविकान्त वर्मा, मुकेश आचार्य, शिवशंकर स्वामी, रतिराम टाक, मोहनसिंह राजपुरोहित, महिला अधिवक्ता लक्ष्मीराजावत, मधुमंगे, मिनाक्षी शर्मा व विजयलक्ष्मी व्यास के साथ सभा में बडी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित हुए।

Bar Association Bikaner   Avnish Harsh   Ramkishan Das Gupta