Saturday, 21 October 2017

हाईकोर्ट का फैसला निराशाजनक, सुप्रीम कोर्ट में करेंगे अपील

सामाजिक न्याय आन्दोलन

आरक्षण रिव्यू के आदेश का स्वागत
 
बीकानेर 10 अगस्त।मूवमेंट फॉर सोशल जस्टिस ने जाट आरक्षण संबधी राजस्थान उच्च न्यायालय के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए ओबीसी आरक्षण में शामिल जातियेां के रिव्यू के आदेश का स्वागत करते हुए इसे एतिहासिक फैसला बताया है। मूवमेंट की कोर कमेटी सदस्य सुरेंद्र सिंह शेखावत ने अपने ब्यान में कहा है कि हालांकि कोर्ट का फैसला हमारी आशाअेंा के अनुरुप नही है, फिर भी क्यों कि हमें न्यायपालिका पर भरोसा है अैार इस फसले का अध्ययन करने के बाद हम इसे सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज करेंगे।
शेखावत ने बताया है कि हाईकार्ट के द्वारा ओबीसी आरक्षण में शामिल जातियेंा के रिव्यू करने का फैसला एतिहासिक है क्यों कि सुप्रीम कोर्ट कई बार ओबीसी में शामिल जातियेां का प्रत्येक दस वर्ष में रिव्यू करने का कह चुका है। बावजूद इसके सरकार ने कभी रिव्यू कराने का काम नही किया। उ मीद है कि हाइकोर्ट के इस फैसले से ओबीसी में शामिल जातियेां के सरकारी सेवाअेंा में और राजनैतिक पदों पर प्रतिनिधित्व का वास्तविक आंकड़ा सामने आ पायेगा।
 मूवमेंट फॉर सोशल जस्टिस के प्रवक्ता यशर्वद्वन सिंह ने कहा है कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयेाग से इंद्रा साहनी  फैसले के मापंदडो के अनुरुप रिव्यू कराने का  प्रयास करेंगे। उन्होने कहा कि हालांकि यह निराशाजनक है कि सरकार के द्वारा नवगठित राज्य पिछड़ा वर्ग आयेाग में एक भी सदस्य मूल ओबीसी वर्ग का नही है और कमीशन के सदस्य सचिव पद पर नियुक्त व्यक्ति पर अपने  न्यायिक सेवाकाल के दौरान जातिगत पक्षपात के आरोप लगते रहे है। ऐसे व्यक्ति के भरोसे  न्याय की उ मीद भी मुश्किल है।
उन्होने कहा कि इस निर्णय का पूरी तरह से अध्ययन करने के पश्चात मूवमेंट के स्टेट कोर कमेटी की मिटिंग बुलाकर आगामी रणनीति तय की जायेगी। 

 

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