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पूर्व सांसद व वरिष्ठ साहित्यकार ने लिखी एक पुस्तक

      29 Jun 2012                 Add comment       Mail        Print       Write to Editor   

बीकानेर, परम्पराओं से नहीं कुरूतियों से लड। यह बात राष्ट्रीय कवि, वरिष्ठ साहित्यकार एवं पूर्व सांसद बालकवि बैरागी ने आज गीतां रो बुगचो  पुस्तक का लोकार्पण करते हुए कही। बैरागी ने काव्य शैली में कहा 

जिन्दगी की फटी चदरिया में पैबन्द काम आते हं।

सम्बन्धी काम नहीं आते सम्बन्ध काम आते है।

 

’’ गीतां रो बुगचो ’’ पुस्तक का  प्रका   ने करवाया है। थार प्रकाषन के लूणकरण छाजेड़ ने बालकवि बैरागी का स्वागत किया। छाजेड़ ने बताया कि दूगड़ परिवार ने राजस्थान की परम्परागत विवाह शैली व लोकगीतों की ’’विरासत’’ को संजोये रखने की राह में अद्भुत कार्य किया है। इस पुस्तक का सम्पादन जतनलाल दुगड़ ने किया है। दूगड़ ने बताया कि पुस्तक में विवाह, जन्मोत्सव आदि अवसरों पर गाये जाने वाले 415 मांगलिक परम्परागत गीतो का समावेष किया गया है। इसके साथ ही विवाह के सभी नेगचार व आवष्यक वस्तुओं की सूची भी पुस्तक में दी गई है। दूगड़ ने बताया कि पुस्तक के साथ ही इन गीतों को गाने के तरीके व राग सहित गीतों के मुखड़ो का संगान कर उसे रिकार्ड किया गया है व उसकी एक आडियो सीडी तैयार की गई है, जिससे आने वाली पीढि़यों तक इन गीतों के साथ ही हमारी समृद्ध परम्पराएं संरक्षित रह सकें। दूगड़ ने बताया लूणीदेवी चैपड़ा एवं रायश्री गोलछा के नेतृत्व में परिवार की महिलाओं ने विवाहोत्सव एवं जन्मोत्सव में गाये जाने वाले गीतों के संकलन में सहयोग किया। कवि गौरीषंकर मधुकर, कर्मचारी नेता गिरिराज पारीक ने भी राजस्थानी विवाह गीतों के संकलन गीतां रो बुगचो को बहुत ही उपयोगी बताया। चन्द्रिका जैन एवं चांदनी छाजेड़ ने कविता प्रस्तुत की। बालकवि बैरागी ने उपस्थित लोगों से कहा कि अपने पोतो-पोतियों के विवाह में इन्हीं गीतों को गाये। महिला संगीत के नाम पर होने वाले फूहड़पन एवं पाष्चात्य संस्कृति को तरजीह न देवें तथा अपनी संस्कृति के संरक्षण एवं संवद्र्वन में सहभागी बनें। हंसराज डागा ने आभार व्यक्त किया। बालकवि वैरागी ने तेरापंथ भवन गंगाषहर में विराजित तेरापंथ धर्मसंघ के वरिष्ठ संत मुनि राजकरण, नगराज आदि चरित्रात्माओ के दर्षन किये व उनसे तव-चर्चा की। बैरागी ने कहा कि आचार्य महाप्रज्ञ के महाप्रयाण के बाद ऐसा लगता है कि धार्मिक जगत में एक अपूरणीय रिक्तता हो गई है। उन्होनें कहा कि प्रचारक तो बहुत है पर विचारक शताब्दियों में कोई कोई ही पैदा होते है। आचार्य महाप्रज्ञ दार्षनिक व विचारक थे। बैरागी जी ने आचार्य तुलसी के समाधि स्थल नैतिकता के शक्तिपीठ जाकर आचार्य तुलसी को अपनी श्रद्वाजंली व्यक्त की।

 

 

 




Tags: Lunkrn Cajed, Motaram Surajmal Dugd family, Bikaner, Rajsthan



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