Wednesday, 18 October 2017

व्यंग्यकार शर्मा एवं शिक्षाविद पडिहार का सम्मान

सखा संगम के तत्वावधान आयोजित हुआ कार्यक्रम

व्यंग्यकार शर्मा एवं शिक्षाविद पडिहार का सम्मान

बीकानेर 1 मई । सखा संगम के तत्वावधान में रविवार को व्यंग्यकार बुलाकी शर्मा एवं शिक्षाविद भगवानदास पडिहार का भावभीना सम्मान किया गया । नत्थूसर बास स्थित बह्य बगीचा में आयोजित कार्यक्रम में नगर की विभिन्न संस्थाओं द्वारा शर्मा एवं पडिहार को माल्यापर्ण, शाॅल, सम्मान पटिटका, साहित्य एवं स्मृतिचिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया । कार्यक्रम में सम्मानित विभूतियों के व्यक्तित्व कृतित्व एवं अवदान पर चर्चा की गयी ।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि नगर परिषद के पूर्व सभापति चतुर्भुज व्यास ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में भगवानदास पडिहार तथा साहित्य के क्षेत्र में बुलाकी शर्मा का समर्पण एवं योगदान अविस्मरणीय है । उन्होने कहा कि दोनो विभूतियों का सम्मान नगर की गौरवषाली परम्परा का निर्वहन है । कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री संगीत भारती के निदेषक डा0 मुरारी शर्मा ने कहा कि गणित के गुरू पडिहार और साहित्य लेखा के साधक बुलाकी जी का सम्मान गौरवपूर्ण है । कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि मरू व्यवसाय चक्र के प्रधान संपादक एवं अर्थषास्त्री डा0 अजय जोषी ने कहाकि पडिहार और शर्मा का सम्मान भारतीय संस्कृति और ज्ञान विज्ञान का सम्मान है । मुक्ति संस्था के अध्यक्ष हीरालाल हर्ष ने कहा कि पडिहार और बुलाकीजी ने अपने कर्म से हमेषा श्रमिकों के कल्याणार्थ कार्य किया है । संयोजक कवि- कथाकार राजेन्द्र जोषी ने कहा कि शिक्षाविद भगवानदास पडिहार ने लम्बे समय तक झुग्गी झोपडियों के बच्चों के लिए गणित जैसे दुरूह विषय का निषुल्क अध्यापन किया है । उन्होने कहा कि बुलाकीजी ने अपने साहित्य के माध्यम से श्रमिकों की पीडाओं को उजागर किया है । सखा संगम के अध्यक्ष चन्द्रषेखर जोषी ने कार्यक्रम के उददेष्यों पर प्रकाष डाला ।
   कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत करते हुए पर्यटन लेखक संघ के महासचिव अशफाक कादरी ने कहा कि शिक्षाविद भगवानदास पडिहार का अध्यापन अनुभव एवं व्यंग्यकार बुलाकी शर्मा का बहुआयामी लेखन हमारे लिए प्रासंगिक और बहुउपयोगी है । समाजसेवी ख्ूामराज पंवार ने कहा कि शिक्षाविद भगवानदास पडिहार का व्यक्तित्व सादा जीवन उच्च विचार से ओतप्रोत है जिसमें धार्मिक आस्था, मानवीयता और भाईचारे के गुण समाहित है । कथाकार स्तंभकार नदीम अहमद नदीम ने बुलाकीजी के कृतित्व पर प्रकाष डालते हुए कहा कि बुलाकीजी की कहानियों में राष्ट्रीय स्तर पर श्रमिकों की संवेदनाएं मुखर हुई है । कार्यक्रम में आलोचक डा0 नीरज दैया ने कहा कि कार्यक्रम में नगर की विभूतियों के सम्मान में आत्मीयता सें आत्मीयता से अभिभूत हूं । कार्यक्रम में पत्रकार हरीष बी0 शर्मा, शिक्षाविद खुशल चंद रंगा, ब्रजरतन जोशषी, डा0 सत्यनारायण स्वामी, नागेष्वर जोषी, कवि नवनीत पांडे, इसरार हसन कादरी, मोहम्मद फारूख ने भी शिरकत की । शब्दरंग साहित्य एवं कला संस्थान के सचिव राजाराम स्वर्णकार ने धन्यवाद ज्ञापित किया ।

 

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