Tuesday, 12 December 2017

प्रेमचंद के संघर्ष व शब्दों की सच्चाई आज भी प्रेरणादायीः व्यास

शहर के 14 साहित्यकारों का सम्मान

बीकानेर, प्रेमचंद अभावों में जिए, उनकी संघर्ष और शब्दों की सच्चाई आज भी प्रेरणा देती है। प्रेमचंद देश के निर्माताओं की श्रेणी में आते है। प्रेमचंद के कृतित्व और उनकी अंतर चेतना को समझने के लिए आज भी सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक स्थितियों को गहराई से समझना जरुरी है। वरिष्ठ लेखक और राजस्थान प्रगतिशील लेखक संघ के अध्यक्ष वेद व्यास ने रा.प्रगतिशील लेखक संघ की और से मुशी प्रेमचंद की जयन्ती के अवसर पर आज यहां टाऊन हाल में ’प्रेमचंद और आज का समय’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी तथा प्रेमचंद सम्मान समारोह की अध्यक्षता करते हुए यह बात कही। नगर निगम के महापौर भवानी शंकर शर्मा के मुख्य आतित्थय तथा आलोचक एवं सम्पादक डॉ.रमांकांत शर्मा, जोधपुर के मुख्य वक्ता के रुप में उपस्थित हुए आयोजन में वेद व्यास ने कहा कि हमें समाज की विसंगतियों को समझना आज के समय की सबसे बडी आवश्यकता है। उन्होने कहा कि प्रेमचंद जनपक्ष धर साहित्यकार थे। व्यास ने कहा कि जब तक आवाम के सपने टूटते रहेंगे प्रेमचंद प्रासगिक रहेंगे।

इस मौके पर मुख्य अतिथि महापौर भवानी शंकर शर्मा ने कहा कि इतिहास इस बात का साक्षी है कि सृजन धर्मियों ने सदैव समाज की विसंगतियों को दूर करने के लिए सृजन किया है। मेयर शर्मा ने कहा कि साहित्यकारों ने अपनी लेखनी के जरिये समाज को हमेशा दिशा प्रदान कर नवीन आयाम स्थापित किए है।

संगोष्ठी के मुख्य वक्ता आलोचक डॉ.रमाकांत शर्मा ने प्रेमचंद और आज का समय विषय पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज का समय सक्रमण काल का समय है। डॉ.शर्मा ने कहा कि प्रेमचद की लेखनी समाज की व्यवस्थाओं को सुधारने की पक्षधर रही है। प्रेमचद ने हमेशा लोगों के दुख दर्द को महसूस किया। उनकी लेखनी में दलित चेतना, स्त्री विमर्श का बारीकी से द्वद्वात्मक विश्लेषण कर उसे अपनी लेखनी में व्यक्त किया। उन्होने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य रिश्तों को सही अर्थ देने में सक्षम है।

इससे पूर्व प्रलेस के जिला संयोजक बुलाकी शर्मा ने उपस्थित जनों को स्वागत करते हुए कहा कि आज के समय मे प्रेमचंद के रचनाकर्म से हम नवीन आयाम स्थापित कर सकते है। कार्यक्रम के दौरान प्रलेस के प्रदेश महासचिव श्याम महर्षि ने कहा कि लेखक का रचना कर्म सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ अव्यवस्थाओं को सुधारने की पैरवी करने वाला होना चाहिए।

इस अवसर पर प्रेमचंद सम्मान समारोह का आयोजन भी किया गया। सम्मान समारोह में अपनी लेखनी से साहित्य जगत को समृद्ध करने वाली 14 विभुतियों का सम्मान किया गया। सम्मान समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार अहमद अली मसूर, चुरु, वरिष्ठ कवि बुलाकी दास बावरा, लालचंद भावुक, शिवराज छंगाणी, डॉ.मदन केवलिया, वरिष्ठ शायर मोहम्मद हनीप समीम, उपध्यान चद्र कोचर, विद्यासागर आचार्य, कजलीदास हर्ष, विद्यासागर शर्मा (गंगानगर) विशान्त (पीलीबंगा) तथा वरिष्ठ शायर गुलाम रसूल शाद जामी को अतिथियों ने माल्यार्पण कर दुप्पटा ओढाकर, श्रीपफल तथा प्रेमचंद सम्मान पत्र प्रदान कर प्रेमचंद सम्मान प्रदान किया गया।

इस अवसर पर सभी सम्मानित साहित्यकारों का महेश जोशी, जाकिर अदीब, राजेन्द्र जोशी, रमेश भोजक समीर, रवि पुरोहित ने जीवन परिचय प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के दौरान उदयपुर, गंगानगर, अजमेर, दौसा, जयपुर, जोधपुर, चुरु आदि क्षेत्रों से आए साहित्यकारों का माल्यार्पण कर सम्मान स्वागत किया गया। प्रो.अशोक आचार्य ने आभार व्यक्त किया। संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह में वरिष्ठ युवा साहित्यकार, पत्रकारों सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित थे।

 

Munsi Premchand   Pragati Lekhak Sangh   Lalchand Bhavuk   Shivraj Chhangani