बीकानेर, राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी बीकानेर का 29 वां स्थापना दिवस थरपणा उच्छब बधुवार को समारोहपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति के क्षेत्र में कार्य करने वाले वयोवृद्ध साहित्यकारों को आगीवाण सम्मान से सम्मानित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो गंगाराम जाखड थे। विशिष्ट अतिथि राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ बी डी कल्ला, साहित्यकार वेद व्यास थे। इस अवसर पर डॉ बी डी कल्ला ने कहा कि राजस्थानी भाषा समृद्ध एवं गौरवशाली है। शब्दकोश लम्बा चौडा है। जिसकी संस्कृति अनूठी और सभी के लिये प्रेरणादायक है। उन्होने कहा कि साहित्य कि साथ-साथ संस्कृति का भी संरक्षण जरूरी है। अकादमी राजस्थानी सभ्यता, संस्कृति और प्राचीन परम्पराओं को बचाये रखने के लिये अकादमी एक म्यूजियम बनाये ताकि आने वाली पीढी राजस्थानी सभ्यता, संस्कृति और प्राचीन परम्पराओं से प्ररेणा प्राप्त कर सके। मुख्य अतिथि प्रो गंगाराम जाखड ने कहा कि वायोवृद्ध साहित्यकारों का सम्मान अच्छी परम्परा है। इस परम्परा से अकादमियों को भी मार्गदर्शन मिलेगा। उन्होने कहा कि राजस्थानी भाषा का अस्तिव कायम रहेगा। इस अवसर पर उर्दू अकादमी के अध्यक्ष डॉ एचआर नियाजी, राजस्थान सिंधी अकादमी के अध्यक्ष नेरश कुमार चंदनानी, श्रीमति सुषमा ने भी विचार व्यक्त किये। अकादमी अध्यक्ष ने अतिथियों का स्वागत किया। अकादमी द्वारा साहित्यकारो को 5100 रूपये, साफा, शॉल, साहित्य, प्रशस्ति पत्र के साथ सम्मानित किया गया।
आगवाणी सम्मान से ये हुये सम्मानित
राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी द्वारा अकादमी के 29 वे स्थापाना दिवस पर आशा शर्मा, कमला कमलेश, खुशाल नाथ धीर, दीपचंद सुथार, नंद किशोर शर्मा, बिहारी शरण, वैघनाथ पंवार, महावीर प्रशाद शर्मा, बुलाकी दास बावरा, रशीद अहमद, रामपाल सिंह, धनन्जय वर्मा, देवदास रांकावत, गौरी शंकर मधुकर, सुखदास कच्छावा, शरत चन्द्र पण्डिया, लक्ष्मण सिंह, सुरेन्द्र अचल, नागराज शर्मा, रघुराज सिंह तथा प्रमेलता जैन को आगीवाण सम्मान से सम्मानित किया गया।
कठै अटक्यों मामलों
अकादमी के थरपणा उच्छब में पहुचे कोलायत विधायक देवी सिंह भाटी अपने चिर-परिचित अंदाज में नजर आये। जब बी डी कल्ला राजस्थानी भाषा की मान्यता के प्रस्ताव को विधानसभा में पारित कर केन्द्र में भिजवाने संबंधित बात कह रहे थे। तब विधायक भाटी बीच में ही बोल पडे अबै मामलो कठै अटक्योडो है, कहकर चुटकी ली। वही जब डॉ बी डी कल्ला देवी सिंह भाटी को मंच पर आने के लिए कहा तो भाटी ने कहा कल्लाजी मंच काई थे तो म्हारे दिल मे बसयोडा हो।
कुर्सियां रही खाली
प्रचार प्रसार के अभाव मे राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के स्थापना दिवस समारोह के लिये पाण्डाल मे लगाई गई अधिंकाश कुर्सियां खाली ही रही। अकादमी परिसर जिस कॉलोनी क्षेत्र मे हुआ वहां भी इसका कोई प्रचार प्रसार नही किया। खाली कुर्सियों को लेकर कार्यक्रम मे बैठे साहित्यकार आपस में फुसफुसाहट करते रहे। खाली कुर्सियों को लेकर कार्यक्रम में आऐ राजस्थानी साहित्यकार व अन्य अपनी-अपनी राय रखते गऐ। जब हमने कॉलोनी वासियों से कार्यक्रम के बारे मे पूछा तो उन्होने इस कार्यक्रम के यहां होने से अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि हमे इसकी कोई कार्यक्रम की जानकारी ही नही मिली तो हम कैसे पंहुचे वहां। जैसे जैसे हम लोगो से इस कार्यक्रम के बारे पूछते गए तो सभी एक ही राजस्थानी उक्ति बोलते गए, क्या पतो भायला कार्यक्रम रो, ऐ तो गोथळी मे गुड भोंगण वाला कार्यक्रम है, म्होंरे तो ना कोई पर्चो आयो, और ना ही कोई बैनर देख्यों। ई कार्यक्रमों मे तीन चार जणा ही हुवे है सम्मान लेवण वाळा, सम्मान देवण वाळा, बोळण वाळा नेता और सरकारी अफसर।
|