Tuesday, 24 October 2017

गांधी जयंती से जैनरिक दवाओं का निःशुल्क वितरण

प्रदेश में 2 अक्टूबर से 13 हजार 874 चिकित्सा संस्थानों पर 320 तरह की जैनरिक दवाओं का निःशुल्क वितरण प्रारंभ किया जाएगा।

बीकानेर। प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य  बी.एन.शर्मा ने कहा है कि प्रदेश में 2 अक्टूबर से 13 हजार 874 चिकित्सा संस्थानों पर 320 तरह की जैनरिक दवाओं का निःशुल्क वितरण प्रारंभ किया जाएगा। इसके लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाओं को पूरा कर लिया गया है। चिकित्सक जैनरिक दवाइयां लिखेंगे इसके भी पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। शर्मा गुरुवार को जिला परिषद के सभागार में बीकानेर संभाग के जिला कलक्टर व चिकित्स  अधिकारियों की बैठक में बोल रहे थे। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेज से सम्बद्घ अस्पतालों में 10 से 12 काउंटर , जिला चिकित्सालयों में 3 से 4   व अन्य चिकित्सालयों में जरूरत के मुताबिक काउंटरों की स्थापना कर अस्पताल में आने वाले सभी रोगियों को निःशुल्क  दवाइयां प्रदान की जाएगी। काउंटरों की स्थापना इस तरह से की जाए कि वहां रोगियों की भीड अधिक नहीं लगे व उनके लिए छाया आदि के पुख्ता प्रबंध हो। प्रमुख शासन सचिव ने कहा कि चिकित्सक अभी से ही जैनरिक दवाइयां लिखने की आदत डाल लें। दो अक्टूबर के बाद अस्पताल में लिखे चिकित्सकों की रोग निदान पर्ची का निरीक्षण जिला स्तर पर व राज्य स्तर पर किया जाएगा। अनावश्यक रूप से ब्राण्डेड दवा लिखने की प्रेक्टिस पाई गई तो संबंधित चिकित्सक के विरुद्घ सेवा नियमों के तहत कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने बताया कि जैनरिक दवाइयां मिले इसके लिए राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन का गठन किया गया है। इसके माध्यम से जैनरिक औषधियां, सर्जीकल एवं डाइग्नोस्टिक उपकरणों की खरीद केन्द्रीकृत व्यवस्था के माध्यम से की जाएगी। इस कॉरपोरेशन के माध्यम से प्रदेश के 6.8 करोड लोग सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। शर्मा ने कहा कि एक सर्वेक्षण के दौरान यह तथ्य सामने आए कि अस्पताल में भर्ती 100 रोगियों में से लगभग 40 को अपना उपचार करवाने के लिए पैसा उधार लेना पडता है। इसी तरह 23 प्रतिशत लोग बीमार होने की स्थिति में चिकित्सक के पास इस लिए नहीं जा पाते क्योंकि उनके पास ईलाज के लिए   संसाधन नहीं होता। उन्होंने बताया कि इस नई व्यवस्था से आम जन के साथ 6 लाख राज्य कर्मचारी व 3 लाख पेंशनर लाभान्वित होंगे। पेंशनर्स को 30 दिन की दवा एक साथ दी जाएगी। निःशुल्क दवा देने वाला राजस्थान देश का 13 वां राज्य होगा। प्रमुख शासन सचिव ने बताया कि राजस्थान में जैनरिक दवाओं की खरीद और वितरण की पारदर्शी व्यवस्था लागू की गई है। सरकार की मंशा न्यूनतम दर पर गुणवतापूर्ण औषधियों को क्रय करना है। औषधि उन्ह निर्माताओं से क्रय की जाएगी जिनका  वार्षिक टर्न ओवर 20 करोड रुपए हो। इसके पीछे सरकार की मंशा उच्च गुणवता की दवाएं खरीदना है। दवाओं का परीक्षण प्रयोगशालाओं में किया जाएगा इसके लिए प्रदेश की प्रयोगशालाओं के अतिरिक्त पडौसी राज्यों की 20 प्रयोगशालाओं की सेवाएं ली जाएगी। दवाओं के वितरण से पहले जांच होने के पश्चात ही दवा रोगी तक पहुंचेगी। शर्मा ने बताया कि 2 अक्टूबर 2011 से आउटडोर आने वाले मरीजों की संभावित संख्या को  ध्यान में रखते हुए दवाओं की आपूर्ति व वितरण की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए प्रत्येक जिले में एक औषधि भण्डार गृह स्थापित किया गया है। जहां से सभी चिकित्सा संस्थाओं को दवा वितरण पास बुक सिस्टम से किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेज से सम्बद्घ अस्पताल व जिला अस्पतालों में  24 घंटें दवा मिलेगी। शेष संस्थानों में दवा वितरण आउटडेार चिकित्सा समय के अनुसार होगा ।

इन्डोर यानि अस्पताल में भर्ती रोगियों के लिए 24 घंटें दवा उपलब्ध रहेगी। अगर कोई मरीज अस्पताल समय के अतिरिक्त चिकित्सक के घर स्वास्थ्य परीक्षण करवाता है तब भी जैनरिक दवा रोगी पास की अस्पताल से निःशुल्क प्राप्त कर सकेगा। घर पर बनी चिकित्सक की रोग निदान पर्ची का दूसरे दिन अस्पताल में इंद्राज करवाकर जरूरत के मुताबिक दवा दी जाएगी। प्रमुख शासन सचिव ने बताया कि सहकारिता विभाग द्वारा वर्तमान में ंसंचालित सभी दवा वितरण केन्द्र यथावत रहेंगे । इनके माध्यम से भी दवाइयां वितरित की जाएगी। वर्तमान में बी.पी.एल., स्टेट बी.पी.एल., अंत्योदय अन्न योजना में आने वाले परिवार एवं वृद्घावस्था पेंशन पाने वाले वाले व्यक्ति, विधवा, विकलांग सदस्यों को पूर्व की तरह मुख्य मंत्री जीवन रक्षा कोष के तहत मिलने वाले लाभ यथावत रहेंगे। मुख्यमंत्री जीवन रक्षा कोष के माध्यम से अब तक 81 लाख लाभान्वित हुए हैं। उन्हने बताया कि जिले की सभी चिकित्सालयों में दवा आपूर्ति के लिए अलग अलग दिन निर्धारित किया जाएगा। बैठक में प्रमुख शासन सचिव शर्मा ने सभी चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिए कि जननी शिशु सुरक्षा योजना के तहत प्रसूता व बच्चे के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाए। ग्रामीण क्षेत्र की महिला को पंचायत समिति मुख्यालय अथवा जिला स्तर पर अस्पताल में प्रसव के लिए लाया जाता है तो उसके लिए वाहन की व्यवस्था पुख्ता की जाए। अस्पताल में भर्ती होने पर 100 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से पौष्टिक आहार दिया जाए। प्रसूता का स्वास्थ्य खराब नहीं हो इसके लिए सभी को व्यक्तिगत स्तर पर प्रयास कर सभी सुविधाएं उपलब्ध करवानी होगी। चिकित्सा केन्द्रों में जननी शिशु सुरक्षा योजना की क्रियान्विति प्रभावी हो इसके लिए जिला कलक्टर 3 स्वास्थ्य केन्द्रों का आकस्मिक निरीक्षण करेंगे तथा अन्य प्रशासनिक अधिकारी व चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त निदेशक,  उप निदेशक व मुख्य चिकित्सा अधिकारी भी समय-समय पर स्वास्थ्य केन्द्रों का निरीक्षण करेंगे। बैठक में संभागीय आयुक्त सूरज मल मीणा ने भी विभिन्न योजनाओं की क्रियान्विति की बात कही। संभाग स्तरीय बैठक में श्रीगंगानगर जिला कलक्टर मुग्धा सिन्हा ने कहा कि जिस तरह स्कूलों में मीड डे मिल में खाना बनाने की पृथक व्यवस्था की गई है उसी तरह अस्पतालों में भी प्रसूताओं के लिए पौष्टिक आहार बनाने की व्यवस्था पर जरूरतमंद महिलाओं को लगाकर रोजगार से जोडा जाए तो बेहतर परिणाम आएंगे।

बैठक में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जोगाराम जांगिड, हनुमानगढ के जिला कलक्टर  व अन्य जिलों के जिला कलक्टर के प्रतिनिधि के रूप में अतिरिक्त कलक्टर, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के डॉ.एम.एल.जैन, डॉ.बी.एल. मीना, डॉ. सारडा सहित संभाग के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, ब्लॉक सी.एम.ओ., मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ.के.सी.नायक,  सैटेलाइट अस्पताल के प्रभारी डॉ.एल.डी.यादव  आदि उपस्थित थे।

 

B N Sharma   Dr M L Jain   Dr B L Meena   Dr L D Yadav   CMHO   Dr K C Nayak   Jogaram Jangid