Tuesday, 23 April 2019
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खुशी मिली इतनी, जो मन में न समाए...

बॉम्बे हॉस्पीटल एंड मैटरनिटी होम में उपचार के बाद दो महिलाएं गर्भवती नि:संतान दम्पत्तियों के लिए फूटी उम्मीद की किरण

हनुमानगढ़। हनुमानगढ़ टाउन की मोना की संगरिया के रफीक से शादी हुए नौ साल हो गए लेकिन उन्हें संतान की प्राप्ति नहीं हुई। मोना मां नहीं बन पाई तो उनकी मां व सास दोनों को चिंता हुई। पति तो तनाव में थे ही। संतान की चाह में क्या-क्या न किया। जगह-जगह पीरों-फकीरों के यहां माथा रगड़ा मगर गोद फिर भी न भरी लेकिन अब मोना के घर किलकारी गूंजने की तैयारी है। वह गर्भवती हो गई है। शादी के नौ साल बाद बच्चे को गर्भ में पाकर पति-पत्नी व अन्य परिजन बहुत खुश हैं। उन्हें यह खुशी हनुमानगढ़ जंक्शन के बॉम्बे हॉस्पीटल एंड मैटरनिटी होम फर्टिलिटी की बदौलत हासिल हुई है।मोना ने करीब दो माह पहले बॉम्बे हॉस्पीटल एंड मैटरनिटी होम में विशेषज्ञ चिकित्सक से राय ली। उन्होंने ब्लड, यूरिन आदि की जांचें कराईं। दूरबीन, अल्ट्रासाउंड से जरूरी चैकअप भी किए गए। इसके बाद ट्रीटमेंट शुरू किया गया। महज एक-डेढ़ महीने में ही सकारात्मक नतीजा सामने है। मैटरनिटी होम की संचालिका डॉक्टर रेणु सेतिया कहती हैं, ‘मोना के चेहरे पर खुशी देखकर बहुत संतोष होता है। आखिर हमारी कोशिश रंग लाई।’मोना की तरह मंजू भी गर्भवती हो गई है। चंदड़ा गांव की मंजू की शादी करीब साढ़े तीन साल पहले मक्कासर के वार्ड पांच निवासी सूरजकुमार से हुई। एक साल बीता, फिर दो और फिर तीन साल लेकिन उनके कोई संतान नहीं हुई। इससे तनाव और निराशा स्वाभाविक थी। उन्होंने दो महीने पहले बॉम्बे हॉस्पीटल में बांझपन एवं टेस्ट ट्यूब बेबी विशेषज्ञ डॉ. सरिता सुखीजा से राय ली तो उन्होंने उन्हें ढाढस बंधाया। जरूरी जांचों के बाद इलाज शुरू किया और महज दो महीने में ही बच्चा कंसीव हो गया। 
बात की निकला समाधान...
किसी भी दंपती के लिए माता-पिता बनना जीवन की सबसे बड़ी मुराद होती है। शादीशुदा जोड़ों के लिए संतान उनके प्यार का प्रतीक होती है। शादी के शुरुआती कुछ साल यूं ही बीत जाने पर भी संतान हासिल नहीं होती तो उनकी फर्टिलिटी पर सवाल खड़े होने लगते हैं। यह समय न सिर्फ महिला बल्कि पुरुष के लिए भी तनाव भरा होता है। डॉ.रेणु सेतिया कहती हैं कि ज्यादातर लोग मंदिर-गुरुद्वारों में दुआएं मांगते रहते हैं। दूरदराज के फर्टिलिटी सेंटर जाने के लिए वे मानसिक रूप से तैयार ही नहीं हो पाते। हमने चार महीने पहले बॉम्बे हॉस्पीटल में फॢटलिटी सेंटर शुरू किया। हर महीने के पहले रविवार को कैम्प लगाकर नि:संतान दम्पत्तियों की जांच शुरू की तो लोगों का संकोच टूटने लगा। लोग अब संतानहीनता के बारे में कैम्पस में आकर खुलकर बात करने लगे हैं। इस कारण समस्या का समाधान भी होने लगा है।डॉ.रेणु सेतिया ने बताया कि अब तक आयोजित कैम्पस में करीब सौ लोगों ने आकर राय ली है मगर जरूरी जांचें महज दस दम्पती ने ही करवाई हैं। इनमें से भी महज पांच दम्पती का ही उपचार शुरू हो पाया लेकिन खुशी की बात है इन पांच में से दो दम्पती के घर में बच्चे की किलकारी गंूजने की तैयारी हो गई है।
डॉ.रेणु सेतिया ने बताया कि हम अन्य दम्पती की जांचें करने में जुटे हैं। उम्मीद है ट्रीटमेंट के बाद उनके भी आशातीत परिणाम सामने आएंगे। 
नहीं करनी चाहिए देरी...
बांझपन एवं टेस्ट ट्यूब बेबी स्पेशलिस्ट डॉ.सरिता सुखीजा का कहना है कि पति-पत्नी को पहला बच्चा शादी के पहले ही साल में प्लान कर लेना चाहिए। दवाएं, अबॉर्शन बाद में नि:संतानता की ओर धकेलेते हैं। यदि पहले साल में बेबी कंसीव नहीं हो पाता है तो डॉक्टर के पास जाने में संकोच नहीं करना चाहिए। डॉक्टर की राय ही आपने जीवन में खुशियां ला सकती हैं। 
डॉ.रेणु सेतिया व डॉ.सरिता सुखीजा कहती हैं कि संतान के बारे में हमारा समाज आज भी परंपरागत विचारधारा पर चलता है। यदि विवाह के बाद दो-तीन साल में संतान नहीं हो तो कई तरह की बातें उठने लगती हैं। नि:संतान दंपती का आत्मविश्वास खोने लगता है। महिलाएं संतानहीनता के लिए खुद को अपराधी मानने लगती हैं।
देरी किस काम की...
डॉ. सुखीजा कहती हैं, पहले लोगों को शादी के दो-तीन साल बाद बच्चे के बारे में सोचने की सलाह दी जाती थी, लेकिन आज काउंसिलिंग में हम सभी को यही कहते हैं कि पहला बच्चा शादी के पहले साल में ही प्लान कर लें। करिअर की वजह से कई लोग दवाएं ले लेते हैं अबॉर्शन करा लेते हैं, लेकिन ये फैसले बाद में दुखभरे साबित होते हैं। डॉ.सुखीजा कहती हैं कि  किसी भी विवाहित जोड़े के लिए माता-पिता बनना जिंदगी में सबसे बड़ी संतुष्टि है। और प्रकृति के इस वरदान से वंचित नि:संतान दंपती माता-पिता बनने का सुख हासिल करने के लिए हर संभव प्रयास कर लेना चाहते हैं लेकिन फर्टिलिटी सेंटर्स पर नजर आने वाले अधिकांश जोड़े प्रौढ़ वय के होते हैं। जिन्हें देख मन में सवाल आता है कि इन प्रयासों में आखिर इतनी देर क्यों। क्यों नहीं शुरुआत में समस्या का निदान ढूंढ लिया जाता। फर्टिलिटी सेंटर पर नि:संतानता की समस्या का विशेषज्ञ डॉक्टर बहुत कुशलता से निदान करते हैं।
नि:संकोच जाएं डॉक्टर के पास...
डॉ. सुखीजा कहती हैं कि शादी के साल-छह महीनों में ही अगर बेबी कंसीव नहीं हो पाता है तो आपको डॉक्टर के पास जाने से संकोच नहीं करना चाहिए। जरूरी जांचों में जो भी कारण हों, ट्यूब्स ब्लॉक, अनियमित माहवारी, अंडों का न बनना, यूट्रस में प्रॉब्लम, शुक्राणुओं से संबंधित समस्याएं आदि। जो भी वजह हो, आप पहले साल में ही सीधे इन्फर्टिलिटी विशेषज्ञों से मिलें, यहां-वहां के इलाज और दवाओं पर पैसा और समय बर्बाद करने की जरूरत नहीं है।
कई हैं समस्याएं...
फर्टिलिटी विशेषज्ञों के अनुसार इसमें सबसे बड़ा दोष हमारे रैफरल सिस्टम का है। देर से इलाज के लिए आने वाले ये मरीज शुरुआत में जिन डॉक्टर्स के पास जाते हैं वही इनके इलाज में देरी के लिए दोषी हैं। सब जानने-समझने के बावजूद वे अपने प्रयास जारी रखते हैं जबकि उन्हें जितना जल्दी हो इन्हें फर्टिलिटी विशेषज्ञों के पास रैफर कर देना चाहिए लेकिन वे ऐसा नहीं करते। यह वजह बाद में कई समस्याओं की वजह बन जाती है। 
रखना चाहिए सब्र...
डॉ. सुखीजा बताती हैं कि फर्टिलिटी सेंटर पर कई बार परिणाम बहुत जल्दी आ जाता है और कई बार परिणाम मिलने में समय भी लग सकता है इसलिए धैर्य बनाए रखना जरूरी है। कई बार लोग बीच में ही इलाज छोडक़र चले जाते हैं। इन ट्रीटमेंट्स के लंबा चलने की सबसे बड़ी यही वजह है। पेशेंट्स को भरोसा और धैर्य दोनों बनाए रखना होता है।
नि:संतानता के बढ़ते मामले...
डॉक्टर सुखीजा के अनुसार इनफर्टिलिटी यानी नि:संतानता के बढ़ते मामलों के कई कारण हैं। आज की पीढ़ी यदि पढ़ाई और करिअर को लेकर इतने ही तनाव में रही तो मुश्किलें बहुत बढ़ सकती हैं। लड़कियों में अनियमित और कम माहवारी की शिकायत आम है। अच्छे करिअर की तलाश  में भटकने वाले लडक़ों में से भी भावनाएं और सहजता गायब हो रही है। सहजता का सीधा रिश्ता हार्मोन स्राव से है। इसमें असंतुलन कई गड़बडिय़ों को जन्म देता है।

 

Medical Report , Khabarexpress.com,

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