Tuesday, 23 July 2019
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व्यास की 80 वीं जयन्ती पर राजस्थानी नाट पर मंचन

रंगकर्मी निर्मोही व्यास की 80 वीं जयन्ती के अवसर पर राजस्थानी नाटक भीखो ढोली नृत्य नाटिका के रूप में मंचित

नाटय लेखक निर्देषक स्व0 निर्मोही व्यास की 80 वी जयन्ती के अवसर पर अनुराग कला केन्द्र एवं श्री संगीत भारती के संयुक्त तत्वावधान में उनके राजस्थानी नाटक ”भीखो ढोली“ का नृत्य नाटिका के रूप में मंचन टाउन हाल में किया गया ।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि  साहित्यकार भवानी षंकर व्यास विनोद ने कहा कि निर्मोही व्यास के राजस्थानी नाटक भीखो ढोली को नृत्य नाटिका के रूप में प्रस्तुत करना अभूतपूर्व प्रयोग है । नाटक अपनी गरिमा के साथ सामने आया है । कार्यक्रम के  अध्यक्ष  संगीतज्ञ डा0 मुरारी षर्मा ने नृत्य नाटिका में सुर,लय ताल के साथ प्रेरित किया े ।  विषिष्ठ अतिथि उपध्यान चन्द्र कोचर, वरिष्ठ रंगकर्मी इकबाल हुसैन, लेखक राजाराम स्वर्णकार तथा मोहनलाल मारू ने नृत्य नाटिका के मौलिक प्रस्तुति को सराहा अतिथियों ने नृत्य नाटिका के कलाकारों को उनके नृत्याभिनय के लिए सम्मानित किया  अनुराग कला केन्द्र के रंग निर्देषक सुधेष व्यास की रंग परिकल्पना में यह नाटक श्री संगीत भारती की प्राचार्य डा0 कल्पना षर्मा तथा डा0 वन्दना षर्मा के निर्देषन में नृत्य नाटिका के रूप में प्रभावी ढंग से मंचित किया गया । इस नृत्य नाटिका में राजा की भूमिका में विमला आर्य,सोनल राणी-सुरभि सोनी,दीवान-भारती भारद्वाज,भीखो ढोली- हर्षल वर्मा,सेविका- मोनिका प्रजापत एवं जयश्री तरफदार ने प्रमुख भूमिकाएं निभाई ।

सहयोगी कलाकार के रूप में पल्लवी राठौड, अमृता राणा, गुंजन षर्मा, ख्याति षर्मा, प्राची मोदी, हर्षिता सक्सेना, भूमिका पंवार, अनमोल अग्रवाल ने विभिन्न भूमिकाओं का प्रभावी निर्वाह किया । संगीत सहयोग राजेन्द्र झुंझ, पाष्र्वस्वर भगवती स्वामी, के0 के0 रंगा के थंे । कार्यक्रम में नवरतन स्वामी, एडवोकेट चतुर्भुज षर्मा ने नृत्य नाटिका को सराहा । नाटिका में राजा जोधा और राणी सोनल के प्रेम को सुन्दर रूप में दर्षाया गया है । राजा जोधा कलाप्रेमी षासक है जिसके राज्य में भीखो ढोली जैसा संगीत साधक रहता है जिसका राजा स्वयं प्रषंसक है । एक बार राजा षिकार को जाता है तो उसकी राणी सोनल राजमहल की परंपराएं तोडकर रंगमहल में रोषनी कर देती है ताकि राजा के चित्र को देखकर उसके वियोग को कम कर सके । इस वियोग को कम करने के लिए वह भीखो ढोली को बुलाकर उसका गायन सुनती है । राजा के षिकार से लौटने पर उसे गलतफहमी होजाती है और वह विचलित होकर अपनी रानी सोनल को भीखौ ढोली को भेंट कर देता है । रानी राजा के इस निर्णय के कारण अन्न जल त्याग देती है जब राजा को अपनी गलती का अहसास होता है तो वह रानी के पास फिर पहुंचकर उसे पानी पिलाता है मगर रानी दुनिया छोड देती है ।  कार्यक्रम का संचालन रामकुमार कुलिष ने किया ।

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