Wednesday, 13 December 2017

धर्म की रक्षा आज की महत्ती आवश्यकता - रविशंकर

महिलाओं का भी उपनयन हो सकेगा हर -वर्ग के लिए वेद - उपनिषेद्

बीकानेर । अब महिलाओं का भी उपनयन संस्कार हो सकेगा और महिलाएं वैदिक धर्म के अनुरूप पाठ पूजा का कार्य कर सकेंगी। इसके साथ ही हर समाज-हर जाति का व्यक्ति वैदिक धर्म को सीखकर वैदिक कार्य सम्पादित कर सकेगा। देश भर में जगह-जगह संस्कृत प्रशिक्षण  शिविर लगाये जाऐंगे तो जगह-जगह सामूहिक पूजाओं व हवन द्वारा वैदिक धर्म के माध्यम से वातावरण को शुद्ध बनाया जाएगा। वैदिक पाठशालाओं की स्थापना कर जात-पांत से ऊपर उठकर हर जाति-वर्ग के विद्यार्थी को वेद उपनिषद् का ज्ञान करवाया जाएगा।ऐसे ही अनेक प्रस्ताव आर्ट आॅफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर जी के सान्निध्य में सम्पन्न प्रथम दो दिवसीय राष्ट्रीय वैदिक धर्म अधिवेशन में पारित किए गए। अधिवेशन में श्री श्री रविशंकर जी ने घोषणा की कि वैदिक धर्म संस्थान महिलाओं के उपनयन हेतु भी कार्य करेगा। उन्होंने महिलाओं हेतु ललिताशहस्त्रानाम की 21 दिवसीय प्रशिक्षण कक्षाओं के शुभारम्भ की घोषणा भी इस मौके पर की। रूद्र पूजा हेतु रूद्रम तथा वैदिक धर्म के ज्ञान हेतु वैदिक कक्षाओं के लिए 30 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर की घोषणा भी श्री श्री ने की। इसके अलावा श्री श्री ने तीन राज्यों में वैदिक पाठशालाएं खोलने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी।

धर्म की रक्षा आज की महत्ती आवश्यकता - श्री श्री रविशंकर

आर्ट ऑफ़ लिविंग के बैंगलोर स्थित मुख्य आश्रम में वैदिक धर्म संस्थान के प्रथम राष्ट्रीय अधिवेशन को सम्बोधित करते हुए श्री श्री रविशंकर जी ने कहा कि धर्म की रक्षा व धार्मिक वातावरण का निर्माण आज की महती आवश्यकता है। उन्होने कहा की पूजा कार्यक्रम नहीं जीवन का अनुभव है। उन्होने कहा कि जात-पांत, छुआछूत, वर्ग - भेद से ऊपर उठकर हर समुदाय को वैदिक धर्म से जोड़ा जाएगा।इस अधिवेशन में भाग लेकर लौटे वैदिक धर्म संस्थान के राजस्थान राज्य समन्वय समिति के सदस्य गिरिराज खैरीवाल ने बताया कि इस अधिवेशन में वैदिक धर्म संस्थान के कार्यक्रमों व क्रियाकलापों पर विस्तृत विचार विमर्श किया गया व रूपरेखा तय की गई। सात सत्रों में सम्पन्न इस अधिवेशन को सम्बोधित करते हुए स्वामी वैश्मपायन ने कहा कि पूर्णता की ओर जाना ही पूजा है। उन्होंने कहा कि पूजा के चार महत्वपूर्ण अंग प्राणायाम, संकल्प,  ध्यान व सत्संग होते हैं। उन्होंने कहा कि हम जब तक चाहत को पकड़े रखेंगे वे पूरी नहीं होंगी। होगी वेद पाठशालाओं की स्थापना - हर संस्कार का दिया जाएगा प्रशिक्षण श्री श्री रविशंकर जी के विद्धान शिष्य स्वामी पूर्ण चेतन्य ने कहा कि इच्छाओं का समर्पण की संकल्प है। उन्होंने कहा कि प्रत्यारोपण से ही शांति मिलती है। इस दो दिनी अधिवेशन के प्रभारी स्वामी काशी ने वीडीएस की भावी योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रूद्र पूजा, दुर्गा पूजा, गणेश यज्ञ, नव ग्रह होम इत्यादि के साथ - साथ नामकरण, अन्नप्रासन्न, विद्यारंभ, मुंडन, विवाह, उपनयन आदि संस्कार पूर्ण वैदिक रीति नीति से क्रियान्वित किए जाऐंगे। उन्होंने उपनयन संस्कार के बारे में विस्तार पूर्वक व्याख्या की।उन्होने बताया कि वैदिक धर्म संस्थान वैदिक रीति-नीति से पाठ-पूजा का अनवरत् प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करेगा तथा वेद पाठशालाओं का भी संचालन किया जाएगा।अधिवेशन का संयोजन करते हुए महाराष्ट्र प्रभारी श्रीमती अल्का विश्वासमुल्की ने कहा कि विभिन्न नवाचारोन्मुखी आयामों से वैदिक धर्म का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। इसके लिए पदयात्रा, सामूहिक पूजा, भागवत कथा, आॅन लाईन पूजा, विद्वत परिषद्, वैदिक क्लासेज, संस्कृत स्पोकन शिविर इत्यादि के माध्यम से वैदिक धर्म के प्रति वातावरण निर्मित किया जाएगा।उन्होंने  कहा कि इसके साथ-साथ वैदिक धर्म संस्थान, आध्यात्मिक, सामाजिक, बौद्धिक, सांस्कृतिक व शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से भी वैदिक धर्म की पुर्नस्थापना हेतु कार्य करेेगा।

दिलों में उतरे वैदिक धर्म -
वैदिक धर्म संस्थान के राजस्थान राज्य समन्वय समिति के सदस्य गिरिराज खैरीवाल ने सुझाव दिया कि वैदिक धर्म संस्थान का उद्देश्य वैदिक धर्म को लोगों के दिलों में उतारना होना चाहिए ना कि वैदिक गतिविधियों का आयोजन करना। उन्होंने सुझाव दिया कि वैदिक धर्म शिक्षा समूह बनाकर शिक्षण-प्रशिक्षण व सार्वजनिक स्थानों पर वैदिक धर्म के प्रति चेतना जगाने का प्रयास किया जाना चाहिए। खैरीवाल ने आर्ट आॅफ लिविंग बीकानेर केन्द्र की मीडिया रिर्पोट  भी श्री श्री रविशंकर जी को भेंट की।राजस्थान प्रभारी श्रीमती अपर्णा शर्मा ने राजस्थान में वैदिक धर्म संस्थान की भावी योजना के बारे में बताया। डाॅ. दुधात्रे व उदयकृष्णन ने गुजरात राज्य की गतिविधियों से अवगत कराया। शोभना ने मेट्रोमोनी व संजीता ने वित्त व्यवस्था पर प्रकाश डाला।आर्ट आॅफ लिविंग ब्यूरो आॅफ कम्यूनिकेशन के कार्तिक कृष्ण, सुजीत सिंह व श्रीकुमार नय्यर ने मीडिया कम्यूनिकेशन व आर्ट आॅफ लिविंग तथा वैदिक धर्म संस्थान के साथ समन्वय पर विचार प्रकट किए। संस्कृत के उत्थान को लेकर भी अधिवेशन में विशद चर्चा की गयी।वैदिक धर्म संस्थान के तीनों ट्रस्टी स्वामी परमतेज, स्वामी सत्योजाता व स्वामी ज्योर्तिमय ने सभी का आभार ज्ञापित करते हुए संस्थान के उद्देश्यों को सतत् व सुचारू रूप से संचालित करने का आह्वान किया। उपस्थित संभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी श्री श्री रविशंकर ने किया। राजस्थान के संभागी -राजस्थान के प्रतिनिधियों के रूप में गिरिराज खैरीवाल (बीकानेर), श्रीमती अपर्णा शर्मा (जयपुर), शंकर हेमराजानी (जयपुर), भरतकुमार जेठमलानी (कोटा), महेन्द्रसिंह राठौड़ (अनूपगढ़) तथा श्रीमती विजय लक्ष्मी रंगा (जोधपुर) ने सक्रिय सहभागिता की। 
17 राज्यों के वीडीएस प्रतिनिधियों ने किया सम्भागित्व -
इस दो दिवसीय सम्मेलन में राजस्थान के अलावा आन्ध्रप्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, झारखण्ड, केरल, कर्नाटका, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, हरियाणा, पंजाब, तमिलनाडू, पश्चिम बंगाल असम, उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के भी वीडीएस राज्य समन्वयक समिति के सदस्यों ने सक्रिय संभागित्व किया। इस अधिवेशन में सभी स्वामीगणों ने अपने - अपने अनुभवों के माध्यम से प्रभावी सुझाव प्रस्तुत किए तथा अपने प्रभार क्षेत्र में इस मिशन को कुशलता व उत्साह के साथ आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उपस्थित सभी राज्य प्रभारियों व समन्वय समिति के सदस्यों ने अपने-अपने राज्य के वर्ष 2013-2014 के वीडीएस के भावी कार्यक्रमों की योजना प्रस्तुत की।
 

 

Shri shri Ravi shankar