Friday, 20 October 2017

वर्षा जल संरक्षण के लिए अनूठी पहल

वर्षा जल संरक्षण के लिए विकसित किया मॉडल

 

बीकानेर। वेटरनरी विश्वविद्यालय, बीकानेर के मुख्य परिसर में बरसाती पानी की एक-एक बूंद को संचित करने के लिए जलग्रहण विकास कार्य करवाये जा रहे हैं। वेटरनरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ए.के. गहलोत ने बताया कि जलग्रहण विकास कार्यक्रम के प्रथम चरण में विजय भवन पैलेस के 60 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में बरसाती पानी को पाईप लाईन व फिल्टर चैम्बर के जरिए विषाल जलकुण्ड़ों में एकत्रित किया जाएगा। जिसमें साढ़े आठ लाख लीटर वर्षा जल संचित होगा। एकत्रित जल का उपयोग परिसर को हरा-भरा बनाने एवं पेयजल उपल्ब्ध करवाने के लिए किया जाएगा। कुलपति प्रो. गहलोत ने बताया कि वेटरनरी विश्वविद्यालय द्वारा लगभग 10 लाख लीटर वर्षा जल संरक्षण के लिए जल संग्रहण  परियोजना को राज्य में एक मॉडल के रूप में तैयार करवाया जा रहा है। इसे राज्य के अन्य संस्थानों को तकनीकी, व्यावहारिक और प्रायोगिक पहलू से भी अवगत करवाया जा सकेगा। कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय की इस जल संग्रहण योजना में संग्रहण क्षमता के अलावा अतिरिक्त जल को भूमिगत कर पुनर्भरण करने के लिए विजय भवन स्थित सुखे कुँए का उपयोग किया जाएगा। मुख्य परिसर में सभी भवनों छतों को और जमीन पर आने वाले वर्षा जल को पाईप लाईन और चैम्बर के जरिए 5 विषाल जल कुण्ड़ों में पहुँचाने के लिए विकास कार्य चल रहे हैं। ढ़ाई-ढ़ाई लाख लीटर जल क्षमता के दो, एक-एक लाख लीटर क्षमता के दो और डेढ़ लाख लीटर जल क्षमता के जल कुण्ड़ो का निर्माण किया जा रहा है। पाईप लाईनों के चैम्बर में फिल्टर का उपयोग किया जाएगा, जिससे कि षुद्ध जल ही कुण्ड़ों में एकत्रित हो। संग्रहित जल के शुद्धिकरण करने की भी व्यवस्था रहेगी। संग्रहित जल को फिटकरी/लाल दवा/क्लोरिन/ब्लीचिंग पाउडर प्रक्रिया से शुद्ध किया जायेगा। छतों के साथ-साथ जमीनी जल भी ड्रेेनज पाईप के माध्यम से जल कुण्ड़ों में लाया जाएगा। इसके अलावा मिलने वाले अतिरिक्त वर्षा जल को परिसर में स्थित एक सूखे कुँए और बोर होल के मार्फत भूमि में पुनर्भरण किया जाएगा। वर्षा जल की स्वच्छता के लिए कई स्तरों पर प्रयास किये गये है। सर्वप्रथम विश्वविद्यालय की सभी छतों की सफाई तथा कमजोर छतों पर वर्षा जल के लीकेज को बचाने के लिए छतों पर टाइल लगाने का कार्य प्राथमिकता से पूरा किया जा रहा है। विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर विजय भवन की छतों पर टाईल लगाने का कार्य पूर्ण हो गया है। विश्वविद्यालय परिसर की सड़कों के किनारे पर ब्लॉक टाईल्स लगाई है, जिससे वर्षा जल वहां एकत्रित न होकर भुमिगत हो सके। जहां-जहां सड़क के किनारे वर्षा जल रूकता है वहां टो-वॉल में पाईप लगाकर इसका उपयोग परिसर में स्थित हरियाली के लिए किया जा रहा है। इस व्यवस्था से विजय भवन परिसर में पिछले 5 वर्षों में एक भी सड़क नही टूटी है।  कुलपति प्रो. गहलोत ने बताया कि विश्वविद्यालय ने पूर्व में भी चौधरी भीमसेन सर्किल एवं गंगानगर राजमार्ग पर एकत्रित वर्षा जल का समुचित उपयोग करने के लिए छात्रावास परिसर की दीवार में छेद कर पाईप लगाकर इस जल को भूमिगत किया है। इससे लाखों लीटर वर्षा जल का भूमि में पुर्नभरण हुआ है तथा साथ ही श्रीगंगानगर राष्ट्रीय राजमार्ग का होने वाले नुकसान से बचाया जा सका है। त्वरित वर्षा जल संरक्षण का विश्वविद्यालय का यह पहला सफल प्रयोग रहा है।  विश्वविद्यालय के निदेशक (कार्य) बसंत आचार्य ने बताया कि कई ऐसे सरकारी संस्थान है जिनके परिसर के बाहर वर्षा जल एकत्रित होता है यदि वर्षा जल को परिसर में ले लिया जाये तो न सिर्फ सड़क को बचाया जा सकता है अपितु परिसर में हरियाली भी पैदा की जा सकती है। जलग्रहण योजना के लिए राज्य सरकार से ओर राषि उपलब्ध होने पर इसे विश्वविद्यालय के तहत आने वाले सभी परिसरों में पूरी शिद्दत के साथ लागू किया जाएगा।