Wednesday, 20 June 2018
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नही रहे अन्नाराम सुदामा

राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार 90 वर्ष के अन्नाराम सुदामा का निधन

बीकानेर, 2 जनवरी। राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार अन्नाराम सुदामा का गुरुवार को गंगाशहर स्थित उनके निवास पर निधन हो गय, वे 90 वर्ष के थे। 
सुदामा का जन्म 23 मई 1923 को हुआ। उन्होंने मैकती काया-मुळकती धरती, आंधी अर आस्था, मेवै रा रूंख, डंकीजता मानवी, घर-संसार और अचूक इलाज जैसे उपन्यास, आंधै नै आंख्यां, गळत इलाज, माया रो रंग, अै इक्कीस कहानियां, पिरोळ में कुत्ती ब्याई, व्यथा-कथा अर दूजी कवितावां जैसे कविता संग्रह लिखे। उनका बधती अंवळाई नाटक, मनवा थारी आदत नै निबंध और दूर-दिसावर तथा आंगण सूं अर्नाकुलम जैसे यात्रा संस्मरण काफी चर्चित रहे। वहीं उन्होंने गांव रौ गौरव जैसे बाल साहित्य का सृजन भी किया। सुदामा ने हिन्दी में अनेक उपन्यास लिखे। इनमें जगिया की वापसी, आंगन-नदियां, अजहुं दूरी अधूरी, अलाव तथा बाघ और बिल्लियां प्रमुख हैं।
सुदामा को राजस्थानी उपन्यास मेवै रा रूंख के लिए 1978 में केन्द्रीय साहित्य अकादमी दिल्ली द्वारा पुरस्कृत किया गया। हिन्दी उपन्यास आंगन-नदियां के लिए राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर का सर्वोच्च मीरा पुरस्कार वर्ष 1991-92 में, उपन्यास अचूक इलाज के लिए राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी का सूर्यमल्ल मीसण शिखर सम्मान प्राप्त हुए। प्रदेश के विशिष्ठ साहित्यकार के रूप में राजस्थान साहित्य अकादमी से 1990 में सम्मािनत हुए। राजस्थानी कविता संग्रह पिरोळ में कुत्ती ब्याई पर राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर पद्य-साहित्य पुरस्कार, नगर विकास न्यास बीकानेर द्वारा डाॅ एल. पी. तैस्सीतोरी पुरस्कार, वैद्य पंडित ब्रज मोहन जोशी साहित्य पुरस्कार के अलावा जुबली नागरी भण्डार और गोइन्का फाउंडेशन के मातुश्री कमला गोइन्का पुरस्कार सहित अनेक पुरस्कारों से सम्मानित हुए थे। 
अन्ना राम सुदामा का राजस्थानी उपन्यास जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर और महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय अजमेर में एम.ए. और बी.ए के पाठ्यक्रम में शामिल रहा। बधती अंवळाई और आंधी अर आस्था उपन्यास क्रमशः स्नातक और हायर सैकण्डरी में राजस्थानी प्रश्न पत्रा के लिए पाठ्यक्रम के रूप में सम्मिलित थे। केन्द्रीय साहित्य अकादमी से ‘मेवै रा रूंख’ उपन्यास का अंग्रेजी एवं हिन्दी अनुवाद प्रकाशित हुआ। 
अन्नाराम सुदामा के निधन पर जिला कलक्टर आरती डोगरा ने शोक जताया। उन्होंने कहा कि सुदामा ने राजस्थानी साहित्य को नई पहचान दी। उनके प्रतिनिधि के रूप में तहसीलदार सत्य नारायण सुथार, गिरदावर श्रीगोपाल हर्ष और हलका पटवारी किशन गोयल ने उनके पार्थिव देह पर पुष्पांजलि अर्पित की। हिन्दी के वरिष्ठ साहित्यकार डाॅ.मदन केवलिया ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया। सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय में उनके निधन पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। सहायक निदेशक (जनसंपर्क) विकास हर्ष ने कहा कि उनका निधन राजस्थानी साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। इस दौरान सहायक जनसंपर्क अधिकारी हरि शंकर आचार्य, शरद केवलिया और पुस्तकालयाध्यक्ष राजेन्द्र भार्गव सहित अन्य कार्मिक मौजूद थे।
 

Rajasthani Writer   Annaram Sudama