Thursday, 14 December 2017

बोर्दिया को भावभीनीं श्रद्धांजलि अर्पित

प्रौढ़ शिक्षा भवन सभागार में रखी गयी श्रद्धांजलि सभा

बीकानेर । पूर्व शिक्षा सचिव, पदमभूषण, गांधी सेवा मैडल (यूनेस्को) व एविसेना पुरस्कार से सम्मानित  स्व.  अनिल बोर्दिया की प्रथम पुण्यतिथि पर बीकानेर प्रौढ़ शिक्षण समिति व जन शिक्षण संस्थान के कार्यकर्ताओं द्वारा सोमवार को प्रौढ़ शिक्षा भवन सभागार में श्रद्धांजलि सभा रखी गई। 
इस क्रम में समिति के अध्यक्ष डॉ. श्रीलाल मोहता ने श्री अनिल बोर्दिया के विराट व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए बीकानेर प्रौढ़ शिक्षण समिति व बीकानेर जिले से अनिल बोर्दिया के लगाव एवं उल्लेखनीय कार्यों पर तथ्य परक एवं भावसिक्त प्रकाश डाला। डॉ. मोहता ने कहा कि श्री बोर्दिया जीवन भर कर्मशील रहे उनकी स्मृति और कर्मठता प्रत्येक सहयोगी को प्रेरणा देती रही है, रहेगी। प्रौढ़ शिक्षा, लोक जुम्बिश, इच वन टीच वन और दूसरा दशक जैसी विभिन्न शैक्षिक योजनाएं उनके विराट चिंतन और अटूट कर्मठता के ही परिचायक है।  उनका जीवन स्वयं ही उनका संदेश है। वे कभी प्रचार प्रसार की लालसा से हमेशा दूर रहे। 
बीकानेर प्रौढ़ शिक्षण समिति, बीकानेर के व्यवस्था सचिव अविनाश भार्गव ने अपने श्रद्धाजंलि व्यक्तव्य में कहा कि हालांकि आज हमारे बीच बोर्दियाजी नहीं है इस अपूरणीय क्षति को कभी पूरा तो नहीं किया जा सकता लेकिन यदि हम उनकी प्रेरणाओं और कर्मठता से उनके कार्यों को आगे बढ़ाने में क्रियाशील बन सके तो यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धाजंलि होगी। एकजुटता क्या होती है? कार्यकर्ता कैसे तैयार होते है? इस बात को अनिल भाई से बेहतर कोई क्या जाने।  समिति की मानद सचिव सुशीला ओझा ने कहा कि  बोर्दिया शिक्षा में निरंतर नवाचारों को बढ़ावा देते थे। आवासीय शिक्षण शिविर उन्हीं की है सकल्पना है जिसके चमत्कारी प्रभाव से कोई अनभिज्ञ नहीं है।   इस क्रम में जन शिक्षण संस्थान के कार्यक्रम अधिकारी नंद पुरोहित ने अपनी बात में कहा कि मैं बोर्दियाजी की कार्य के प्रति निष्ठा, स्वयं के प्रति निष्ठा और अपनों के प्रति निष्ठा इन तीनों निष्ठाओं के प्रति पूर्णत. श्रद्धानवत हूंं।  संस्थान व समिति के कार्यकर्ताओं ने बोर्दिया के साथ समिति और स्वयं से जुड़े अपने अनुभवों को व्यक्त किया। श्रद्धांजलि सभा में आनंद पुरोहित ने बोर्दिया जी की प्रिय प्रार्थना तू राम है, तू ही रहीम है की भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। 

pay homage to Boardia    Dr Shri Lal Mohata