Monday, 23 October 2017

शिक्षा विभाग की पोल खोल रहे है सरकारी विद्यालय

विकास को तरस रहा डाइयां गांव का राजकीय विद्यालय डाइयां।

बीकानेर, एक तरफ जहां सरकार शिक्षा का अधिकार कानून लगाकर हर बच्चे को शिक्षित करने के दावे कर रही हैं। वहीं स्वयं सरकार द्वारा स्कूलों की दशा व व्यवस्था तथा शिक्षा के माहौल को सुधारने के लिए सरकार के द्वारा चलाई गई योजना इन दावों की पोल खोल रही हैं।  नाल के पास स्थित डाइयां गांव के राजकीय विद्यालय परिसर के आसपास बिखरा कचरा, स्कूल का भवन जर्जर अवस्था में, टूटा-फूटा पेशाब घर, स्कूल  में पीने का पानी बहुत ज्यादा फ्लोराइड युक्त, पोषहार पकाने के लिए गैस कनेक्शन नहीं, स्टाफ की कमी और स्कूल परिसर में लाईट की कमी किसी एक जगह पर एक साथ इतनी सारी अव्यवस्थाओं  के बीच विद्यार्थी अपने सुनहरे भविष्य को किस तरह सुनिश्चित कर पायेगा। स्कूल का निर्माणाधीन भवन टूटा-फूटा पड़ा है  जिससे छोटे-छोटे बच्चों पर हमेशा गिरने-पडऩे तथा घायल होने का खतरा मंडराता रहता है।  यह सारी अव्यवस्थाएं सिर्फ मात्र किसी एक सरकारी विद्यालय की नहीं है जिले में कई ऐसे सरकारी विद्यालय है जहां इस तरह की अव्यवस्थाएं आम तौर पर देखने को मिलती है लेकिन ना ही तो जिला प्रशासन ना ही शिक्षा विभाग इस और कोई ध्यान दे रहा है। ऐसे में ग्रामीण बच्चों के भविष्य पर अंधकार की काली छाया पडऩा स्वाभाविक है। क्योंकि आज भी देश की ८० प्रतिशत जनसंख्या गांवों में निवास करती है अगर ग्रामीण इलाकों में संचालित सरकारी विद्यालयों की ऐसी दुर्दशा होगी तो ग्रामीणों का अपने बच्चों की शिक्षा के विकास को लेकर गांवों से शहर की ओर पलायन करना स्वाभाविक है। 
विद्यालय परिसर के आगे गन्दगी का आलम 
 नाल के पास स्थित डाइयां गांव के विद्यालय परिसर के आसपास गंदगी का आलम बना हुआ है। गंदगी व कूड़े-करकट के चलते व इस गंदगी की दुर्गंध से विद्यालय के आगे के मार्ग से गुजरने वाले राहगीरों को भी नाक बंद करके गुजरना पड़ता है। किन्तु इस विद्यालय में पढ़ाने वाले अध्यापक-अध्यापिकाएं व पढऩे वाले छात्र-छात्राओं के लिए यह गंदगी, कूड़ा-करकट का माहौल व वातावरण स्वास्थ्य के लिए कैसे प्रतिकूल हो सकता है।  रोजाना विद्यालय आना उनकी मजबूरी है और विद्यालय परिसर के आसपास फैली गंदगी से होकर गुजरना भी जरूरी है। इतना ही नहीं विद्यालय परिसर के सामने पानी का हौज के पास कीचड़ फैला हुआ जिससे अनेकों मौसमी बीमारियों फैलने की आशंका भी बनी हुई है। 
परीक्षाएं सिर पर, विद्यालय में विद्युत कनेक्शन नहीं 
विद्यार्थियों की परीक्षाएं एक सप्ताह के बाद शुरू होने वाली है और इन परीक्षाओं की तैयारियों में जूटे परीक्षार्थियों के लिए इस समय गांवों में चल रही बिजली की अघोषित कटौती बैरण बन गई। गांव में विद्युत कटौती तो वहीं दूसरी और अपने स्वयं के विद्यालय में विद्युत कनेक्शन नहीं होने के चलते विद्यार्थियों की परीक्षा के लिए तैयारी करना अपने आप में एक चुनौती पूर्ण कार्य हो गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में वर्तमान में सुबह और शाम के समय बिजली गुल रहना परीक्षाओं की तैयारियों में लगे परीक्षार्थियों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। इन दोनों समय में बिजली नहीं होने से पढ़ाई करने दिक्कतें आ रही है। वहीं विद्यालय में अगला सत्र जब शुरू होगा तो वह अध्यापकों एवं विद्यार्थियों के लिए बेहद ही चुनौतीपूर्ण होगा क्योंकि विद्यालय में विद्युत कनेक्शन नहीं होने से गर्मियों में विद्यार्थियों का विद्यालय परिसर में बैठना भी दुस्वर हो जायेगा। एक और भीषण गर्मी तो  दूसरी और विद्यालय में विद्युत कनेक्शन नहीं होने से पंखे एवं बल्ब नहीं होने से विद्यार्थियों के लिए परेशानी का सबब रहेगा। 
प्रधानाचार्य  ने कहा की राजकीय प्राथमिक विद्यालय डाइयां में मुलभूत आवश्यकताओं की कमी है। विद्यालय परिसर के सामने गंदगी का आलम है और स्कूल परिसर में जो पीने लायक पानी आता है वह पानी में बहुत ज्यादा फ्लोराइड युक्त है। स्कूल परिसर में बिजली कनेक्शन नहीं होने से कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।  उन्होंने बताया कि समय-समय पर शिक्षा विभाग के अधिकारी निरीक्षण करने आते है फिर भी इस संबंध में कोई सुनवाई नहीं हो रही है। स्कूल परिसर में आने-जाने का साधन का अभाव है। पोषहार पकाने के लिए गैस कनेक्शन नहीं है और विद्यालय परिसर के सामने गंदगी का आलम है।  इस संबंध में स्थानीय प्रशासन को मौखिक व लिखित शिकायत की फिर भी आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।