Monday, 23 October 2017

मालिकाना हक के लिए सालों से भटक रहा है परिवार

हर जगह की फरियाद, कहीं नहीं मिला न्याय, कार्मिकों की लापरवाही पड़ी भारी

बीकानेर। एक ओर राज्य सरकार संवेदनशील, पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन का दावा  करती है वहीं दूसरी ओर आए दिन आमजन अपने कार्यों के लिए भटकते रहते हैं। सरकार  के इन दावों की पोल एक बार और खुल गई जबकि अपने ही प्लॉट का मालिकाना हक  पाने के लिए एक परिवार पिछले बीस सालों से दर-दर भटक रहा है। इस परिवार ने  लगभग प्रत्येक अधिकारी और जनप्रतिनिधि के पास पहुंचकर फरियादें की हैं लेकिन अब  तक नतीजा सिफर ही रहा है और हद तो तब हो गई जब मुख्यमंत्री के महत्वाकांक्षी ‘सुनवाई  का अधिकार अधिनियम’ के तहत भी इस प्रकरण की सात-आठ बार सुनवाई हो चुकी है।  प्रकरण आरपीजी में दर्ज हो चुका है लेकिन नगर विकास न्यास के अधिकारी प्रशासन और  सरकार की आंखों में धूल झोंकते हुए सरकार के दावों को खोखला साबित कर रहे हैं।
छोटा राणीसर बास में रहने वाली गायत्री देवी पुरोहित को नगर विकास न्यास  द्वारा 12 जनवरी 1994 को मुरलीधर व्यास नगर में 15 गुणा 30 आकार का एक प्लॉट  (संख्या 4 एफ 61) आवंटित किया गया। यूआईटी न ही तो इसका कब्जा दे सकी और न  ही कब्जा न देने का कारण बता सकी। आवंटी द्वारा लगभग पन्द्रह वर्षोंं तक चक्कर  निकालने के बाद 14 अगस्त 2007 को इसी कॉलोनी में प्लॉट संख्या 4 एफ 103 आवंटित  किया और स्थिति वहीं ढाक के तीन पात वाली रही। यूआईटी ने न तो कब्जा दिया और न  ही कब्जा न देने के कारणों का खुलासा किया। बाद में न्यास ने तीसरी बार उसी आवंटी  को 20 मई 2010 को एमडी व्यास नगर में 4 एफ 5 प्लॉट आवंटित किया और जब कब्जा  देने की बात आई तो पता चला कि यह प्लॉट पूर्व में ही किसी अन्य को आवंटित किया जा  चुका था। मध्यमवर्गीय परिवार के लिए यह स्थिति काटो तो खून नहीं वाली हो गई।  गैरजिम्मेदाराना तरीके से कार्य करने वाले कार्मिकों के खिलाफ  कार्यवाही करने की बजाय  नगर विकास न्यास अपने कार्मिकों को शह दे रहा है और उपभोक्ता परिवार की समस्याओं  की ओर उनकी नजर नहीं है। 
तीसरी बार ठगा सा महसूस करने के बाद आवंटी परिवार ने नगर विकास  न्यास के अधिकारियों से संपर्क किया तो प्राथमिक दौर में तो किसी ने इसके प्रति  जिम्मेदारी लेने से मना कर दिया और आवंटी परिवार की बातों को अनसुना कर दिया।  इसके बाद उन्हंोंने शहर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष जनार्दन कल्ला, नगर विकास न्यास के अध्यक्ष  मकसूद अहमद, कांग्रेस अध्यक्ष यशपाल गहलोत, न्यास सचिव अरूण प्रकाश शर्मा से  दर्जनों बार मुलाकात कर अपनी पीड़ रखी लेकिन उन्हें प्रशासनिक तंत्र से किसी प्रकार की  राहत नहीं मिली। बाद में मुख्यमंत्री द्वारा राज्य में ‘सुनवाई का अधिकार’ लागू किया गया  तो उनके लिए उम्मीद बनी लेकिन जिला कलक्टर की सुनवाई में सात-आठ बार जाने तथा  लगभग 15 से 20 बार उनसे व्यक्तिगत मुलाकात करने के बाद भी उन्हें कहीं से किसी प्रकार  की राहत नहीं मिली है। 
जनसुनवाई में जाने के बाद न्यास कर्मचारियों की ओर से भी उन्हें ठगा सा  जवाब मिला। कार्मिकों ने कहा कि जनसुनवाई मे ंगए तो वहीं से ले लेना प्लॉट। न्यास  सचिव एक ओर मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन होने की बात कर रहे हैं लेकिन इसकी  कोई लिखित सूचना उनके द्वारा नहीं दी जा रही है। वहीं दूसरी ओर न्यास की 5 सितम्बर की  बैठक में ऐसे मामलों के प्लॉट के आवंटन का निर्णय किया गया है। आवंटी द्वारा सुगम में  भी लगभग एक माह पूर्व मामला दर्ज करवाया जा चुका है लेकिन वहां से मामला जिला  प्रशासन को भिजवाने की सूचना तो आई है लेकिन जिला प्रशासन ने अब तक क्या किया  इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। 
इस पूरे घटनाक्रम में सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया  निशान तो लगा ही है साथ ही उपभोक्ता को मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान होने के  अलावा अमूल्य समय की हानि भी उठानी पड़ी है। हर तरफ से हार चुके उपभोक्ता परिवार  अब मामले को राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मानवाधिकार आयोग, महिला आयोग के अलावा  अलग-अलग स्तर पर मामले को भेजने की तैयारी कर रहा है। उन्हें विश्वास है कि लोकतंत्र  में किसी न किसी स्तर पर उन्हें न्याय मिलेगा। इसी क्रम में उन्होंने बीकानेर के  जनप्रतिनिधियों से व्यक्तिगत रूप से दोबारा मिलने का निर्णय भी किया है।

Family ownership is wandering   Jnsunwai in Bikaner   Mini Ranisr Bass   city\'s former president Janardan