Wednesday, 18 October 2017

प्रशासनिक उपेक्षा की शिकार आवासीय काॅलोनियाँ 

मुलभूत सुविधाओं के इन्तजार में

प्रशासनिक उपेक्षा की शिकार आवासीय काॅलोनियाँ 

बीकानेर, (विवेक मित्तल) राज्य सरकार गणतन्त्र दिवस समारोह मनाने मरुनगरी बीकानेर में आ रही है यह बीकानेर के लिए एक अच्छा पहलू है। लेकिन सरकार के आने की खबर से सर्दी के माहौल में बीकानेर की राजनीति में गर्मी उफान पर है। चन्द मुद्दो पर राजनीति हो रही है लेकिन बीकानेर में नई बसी आवासीय काॅलोनियों वल्लभ गाॅर्डन काॅलोनी, कान्ता खतूरिया काॅलोनी, गांधी काॅलोनी, बजरंगपुर, पटेल नगर, शिववैली, सूरजपुरा, तिलक नगर, तथा जयपुर रोड़ पर बसी अनेकों आवासीय काॅलोनियाँ है जिन्हें चाहे यूआईटी ने बसाया या प्राइवेट काॅलोनाइजर्स ने, सभी की दयनीय हालत है, दुर्दशा है, नासूर बन चूके इन फफोलों की तरह कोई नहीं देख रहा, इनके निवारण के लिए कोई राजनेता आगे नहीं आ रहा। इस सभी आवासीय काॅलानियों की समस्याएँ भी एक जैसी है सभी में आधारभूत सुविधाओं का अभाव है, और जो विकास हुआ भी है वो ऊँट के मुंह में जीरे के सामान प्रतीत होता है। जहाँ एक ओर आवासीय काॅलोनियाँ सुविधाओं से वंचित हैं तो कुछ विकसित काॅलोनियां अतिक्रमण की समस्याओं की मारी हैं। बीकानेर के अन्य मुद्दों से भी बड़ी हैं इन आवासीय काॅलोनियों की समस्याएँ लेकिन प्रशासन और राजनेताओं की निष्क्रियता के चलते समाधान नहीं हो पा रहा है।
    इन काॅलोनियों में मध्यमवर्गीय, नौकरीपेशा, सेवानिवृत्त के साथ-साथ बड़े राजनेता भी निवास करते हैं लेकिन सुध लेने वाला कोई नहीं। रोजमर्रा की जिन्दगी में इन नासूर समस्याओं से हमेशा दो-चार होना पड़ता है यहां के वाशिन्दों को। अधिकांश निवासी अपने जीवन की गाढ़ी कमाई, येनकेन प्रकरेण पूंजी का इन्तजा कर एक आशियाने की ख्वाहिश में यहां आकर बसे लेकिन मुलभूत सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं मिला। इनसे बेहतर स्थिति तो कब्जाधारियों की है जिन्हें कच्ची-बस्ती के नाम पर सड़क-पानी-बिजली-नालियों जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं। और इन काॅलोनियों में रहने वालों की स्थिति तो “धोबी के कुत्ते के समान हो गयी है” ना घर का ना घाट का। अस्तित्व बचाने के लिए राजनीति की बिसात पर गोटियां मत सेको। वर्तमान में तो क्या नेता, क्या प्रशासनिक अधिकारी क्या यूआईटी, क्या नगर निगम सभी मुर्ख बना रहे हैं। कोई भी स्थिति स्पष्ट नहीं करता कि इन आवासीय काॅलोनियों में विकास करवाने की जिम्मेदारी किसकी है? फरियाद करें भी तो किससे। सरकार प्रशासन को चाहिये कि इन काॅलोनियों में सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर नियोजित तरीके से ढांचागत विकास नीति बना कर शीघ्रातीघ्र इनके वाशिन्दों को राहत प्रदान करायें।
ये प्रमुख समस्याएँ हैं जिन पर सरकार को ध्यान देने की आवश्यकता है-
1.    सीवरेज का अभाव
2.    सड़कों की जर्जर अवस्था और अनेकों स्थानों पर पक्की सड़क का अभाव।
3.    रात्रि के समय समुचित प्रकाश की व्यवस्था ना होना।
4.    नियमित सफाई का अभाव।
5.    पार्कों का अभाव तथा वर्तमान पार्कों का उचित ढंग से रखरखाव ना होना।
6.    हाई वाॅल्टेज लाईनों को घरों के ऊपर से स्थानान्तरित करना।
7.    पेयजल आपूर्ति हेतु पाइप लाईनों का अभाव।

 

जरा इनकी भी सुनिये
वल्लभ गाॅर्डन काॅलोनी वासी रामचन्द्र मुलू कहते हैं कि बड़ें संघर्ष से एक सम्पर्क सड़क बनी थी वो भी सीवरेज के अभाव में जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो गयी है। रात्रि के समय वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त होते है।

 

गांधी काॅलोनी वासी से.नि. मेजर शीशराम पूनियां कहते हैं कि सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं मिल पा रहा है यहां का निवासियों को अब तो अंधेरे में रहने की आदत हो गयी है।

 

खतूरिया काॅलोनी विकास समिति के सचिव वासुदेव गोस्वामी के अनुसार काॅलोनी में सीवरेज का न होना सबसे बड़ी समस्या है। इस क्षेत्र में एमपी और संसदीय सचिव का निवास स्थान भी है फिर भी विकास नहीं हो पा रहा है यहां का।

 

पूर्व वार्ड पार्षद साकेत शर्मा कहते हैं कि जे.एन.वी. काॅलोनी में विकास तो हुआ है लेकिन यहां के बुद्धिजीवी नागरिकों ने सड़कों पर कब्जे कर लिये हैं। नालियां बन्द कर दी हैं जिससे पानी सड़कों पर बिखरा रहता है। हालत कच्ची बस्ती जैसे ही जायेंगे थोडे़ दिनों में।

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