Tuesday, 12 December 2017

साध्वी कनकप्रभा का प्रातःकालीन मंगलपाठ

मनुष्य का जीवन मिलना दुर्लभ: साध्वी प्रमुखा

गंगाशहर 25 फरवरी 2014। महाश्रमणी साध्वी प्रमुखा कनकप्रभा जी ने नैतिकता के शक्तिपीठ पर प्रातःकालीन संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कह कि चार अंगो में मनुष्य का जीवन मिलना दुर्लभ है। उसका जीवन कैसा होना चाहिए? भगवान् महावीर अनुसार जीवन संयम्, अहिंसा एवं तपमय हो। आधुनिक मानव इस भाषा को कम समझता है। हमारे जीवन में चार बातों का समावेष होना चाहिए च्मंबमनिससए च्नतचनेमनिससए च्तवकनबजपअमए च्तवहतमेेपअम। उन्होंने चारों बिन्दुओं की चर्चा करते हुए कहा कि च्मंबमनिसस हर व्यक्ति चाहता है हमारा जीवन शान्ति से सुख से समाधि से व्यतीत हो। पर चाहने मात्र से सुख शान्ति नहीं मिलती। शान्ति, सुख, किन-किन उपायों से मिल सकती हैं। मात्र चिंतन से शान्ति से शान्ति नहीं मिलती। सबसे पहले किसी कार्य के लिउ दृढ़ संकल्प, प्रयोग और अनुभव करें। भगवान महावीर ने शान्तिमय जीवन के लिए अहिंसा, संयम, तप आदि बतलाए। व्यक्ति अनावष्यक एवं क्रूर हिंसा से बचे। तपस्या के विविध प्रयोग करे। तपस्या के प्रयोग कितने सरल होते है। रात्री शयन के समय तिविहार, चौविहार त्याग कर दे तो सहज तपस्या हो जाती हैं। लेट उठने वाले छोटे से तप का ध्यान दे तो नवकारसी हो सकती हैं। 12 बजे के बाद त्याग करने से हो सकता हैं। छोटे-छोटे प्रयोग से संयम, तप हो सकता है।
संसार मे व्याधि, दुःख है उन सबकी शान्ति के लिए प्रयत्नषील रहे। साध्वी प्रमुखा कनकप्रभा जी ने कहा कि च्नतचनेमनिसस जीवन उद्देष्यपूर्ण जीए। पेट भरना, परिवार पालन पोषण करना कोई बड़ा लक्ष्य नहीं। व्यक्ति को लक्ष्य महान् बनाना चाहिए। मोक्ष लक्ष्य उसकी प्रक्रिया के अनुसार छोटे-छोटे लक्ष्य उनाएं। उन्होंने कहा कि च्तवकनबजपअम उत्पादकता बढ़े। व्यक्ति का जीवन आलस्य से परिपूर्ण न हो। उसकी सृजनात्मक चेतना जागे। कुछ न कुछ करते रहे। नवकार मंत्र जप से लेकर कोई न कोई क्रिया निरन्तर चलाती रहे। साध्वीप्रमुखा जी विषय की मिमांषा करते हुए कहा कि च्तवहतमेेपअम हमारा जीवन बने। गतिषीलता प्रवर्द्धमान रहें। अध्यात्म जीवन में लाभ, विकास होता रहे। विकासमूलक जीवन सफल हो सकता हैं।शान्तिमय एवं स्वर्णिम जीवन के लिए इन चारों बातों का सलक्ष्य प्रयत्न करना अपेक्षित हैं। साध्वी प्रमुखा कनकप्रभा जी ने बताया कि आचार्य महाश्रमण जी आज कालू से विहार कर लूनकरनसर की तरफ पधारेंगे। उपस्थित सभी श्रावकों को वहद् मंगलपाठ सुनाया।