Tuesday, 23 July 2019
khabarexpress:Local to Global NEWS
  2298 view   Add Comment

जीवन में पारदर्षिता होनी चाहिए: साध्वी प्रमुखा कनकप्रभा

 गंगा शहर  नैतिकता के शक्तिपीठ में विराजित साध्वी प्रमुखा कनकप्रभा जी ने अपने मंगल उद्बोधन में फरमाया कि आज के कलचर मे हर कोई स्मार्ट बनना चाहता हैं। अंग्रेजी भाषा में स्मार्ट शब्द के अनेक अर्थ मिलते हैं। प्रत्येक व्यक्ति स्मार्ट बन सकता हैं बस उसके लिए जीवन में आवष्यक है- विषेष गुणवन्ताओं का अर्जन। यदि गुणों को जीवन में स्थान दे दिया तो हर कोई व्यक्ति स्मार्ट बन सकता हैं। इस स्मार्ट शब्द में 5 शब्द हैं। “व्यक्तित्व को बनाएं ैड।त्ज् (स्मार्ट)” हर व्यक्ति अच्छा जीवन जीना चाहता हैं, अच्छा कहलाना चाहता हैं जिसके ये अर्थ हो सकता हैं- ैण् शब्द का एस प्रमुखा श्री जी ने कहा कि ”सिम्पलिसिटी“ अर्थात सादगी यदि जीवन में सादगी है तो स्मार्ट बना जा सकता हैं। जितना भी आडम्बर, दिखावा होता है वह सब क्षणिक हैं। वास्तविक सादगी तो संयम से आती हैं। अणुव्रत आन्दोलन का घोष भी हैं- संयमः खलु जीवनम्। अतः संयमित होकर सादगीमय जीवन जीकर स्मार्ट बना जा सकता हैं।
डण् एम का अर्थ हैं ”मोरेलिटी“ यानि नैतिकता इस षब्द को विस्तार रूप में बताते हुए प्रमुखा श्री जी ने कहा कि अणुव्रत की मूलभूत नीवं नैतिकता पर टिकी हुई हैं। समाज, संस्था, परिवार आदि के प्रति नैतिक निष्ठा होनी चाहिए। जिसके जीवन में नैतिकता होती है वह व्यक्ति व्यवस्थित एवं निर्भय होकर जी सकता हैं। अनैतिकता में भय रहता हैं और वहीं नैतिकता में अभय अतः हर क्षेत्र में प्रामाणिकता के साथ नैतिक निष्ठा होनी चाहिए।।ण् ए शब्द का अर्थ हैं “अकाउन्टिब्लीटि” यानि प्रतिबद्धता विस्तार पूर्वक बताते हुए प्रमुखा श्री जी ने बताया कि जिस संस्था, कम्पनी में काम कर रहे हैं उसके प्रति प्रतिबद्धता होनी चाहिए। उसके प्रति दायित्व निभाने की प्रबल भावना होनी चाहिए।
त्ण् आर को विस्तार रूप में बताते हुए प्रमुखा श्री जी ने कहा कि आर का अर्थ हैं ”रेसपोन्सिब्लीटि“ यानि उत्तरदारित्व समझना। हम स्वयं के प्रति क्या उत्तरदायित्व है ? यह स्वयं से प्रष्न करें। जैसे हमें मनुष्य जन्म मिला, धार्मिक परिवार मिला, सद्गुरूओं की संगति मिली तो फिर भी क्या हम अपने प्रति जागरूक है ? तथा ओर भी हम जिस परिवेष में रहते हैं उसके प्रति अपनी जिम्मेवारी निभाये।
ज्ण् टी का अर्थ हैं “ट्रान्सपेरेन्सी” यानि पारदर्षिता को विस्तार रूप से बताते हुए साध्वी प्रमुखा कनकप्रभा जी ने बताया कि जीवन में पारदर्षिता होनी चाहिए। हम करें कुछ और दिखायें कुछ ये नहीं होना चाहिए। जो व्यक्ति जितना पारदर्षी होता हैं वह उतना ही प्रतिष्ठित होता जाता हैं। तथा टी. शब्द का अर्थ एक और हो सकता हैं कि टाइम मैनेज्मेन्ट समय प्रबन्धन। हम समय का नियोजन करें कि किस समय क्या कार्य करना चाहिए। कौनसा काम पहले व कौनसा कार्य बाद में इसका विवके होना चाहिए। इस प्रकार इन सु.त्रों को जीवन में उतारकर स्मार्ट व्यक्तित्व के धनी बना जा सकता हैं। 

 

 

Share this news

Post your comment