Saturday, 23 June 2018
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मोक्ष की यात्रा के लिए भी आरक्षण हो: कनकप्रभा

गंगाषहर  नैतिकता का शक्तिपीठ में विराजित साध्वी प्रमुखा श्री कनकप्रभा जी ने अपने पावन पाथेय में कहा कि आप सब यात्री हैं। यात्रा करते हैं। यात्रा के लिए टिकट भी खरीदते हैं। आज की व्यवस्था में पहले से ही लोग आरक्षण, रिजर्वेषन करवा देते हैं। क्योंकि रिजर्वेषन से बैठने, सोने आदि की सुविधा हो जाती हैं। छोटी-2 यात्रा के लिए सब पहले से ही ध्यान दे देते हैं। आरक्षण करवा देते हैं किन्तु जीवन की लम्बी यात्रा के लिए - कभी सोचा क्या ? 
साध्वी प्रमुखा श्री कनकप्रभा ने कहा कि भगवान महावीर ने कहा- यदि आप लम्बी यात्रा यानि कि मोक्ष की यात्रा करना चाहते हैं तो उसके लिए भी आरक्षण चाहिए और वह आरक्षण हैं- सम्यक्त्व। जो व्यक्ति अपने जीवन में यदि एक बार सम्यक्त्व प्राप्त कर लेता हैं तो उस व्यक्ति के लिए मोक्ष निष्चित हैं। कितने जन्मों में, भवों में ये निष्चित नहीं किन्तु मोक्ष जाना निष्चित हैं। जैन धर्म में आस्था रखने वालों के लिए जरूरी हैं कि उन्हे सम्यक्त्व की उपलब्धि हो। प्रष्न उठता हैं कैसे की जाए या हमारे भीतर सम्यक्त्व हैं या नहीं इसकी कैसे पहचान कि जाएं ? तो भगवान महावीर ने दो आधार बताये हैं। 1. निष्चय  2. व्यवहार।जैसे - जैसे व्यक्ति के कर्मों का हल्कापन होता है तथा अनन्तानुबन्धी चतुष्क व दर्षनमोहनीय त्रिक् के उपषम तथ क्षयोपषम से व्यक्ति को सम्यक्त्व की प्राप्ति होती हैं।कौन व्यक्ति सम्यक्तवी हैं इसके बारे में केवलज्ञानी ही बता सकते हैं। प्रमुखा श्री ने फरमाया कि इसकी कई कसौटियाँ भी भगवान ने बताई हैं। पहली कसौटी हैं - मिथ्यात्व के 10 बोल जैसे- धर्म को अधर्म समझना, अधर्म को धर्म समझना , जीव को अजीव समझना, अजीव को जीव समझना, साधु को असाधु समझाना, असाधु को साधु समझना आदि-2 इस प्रकार 10 भेद होते हैं।जिसका दृष्टिकोण मिथ्या हैं उसे सम्यक्त्व की उपलब्धि नहीं हो सकती। सम्यक्त्व की सबसे सरल कसौटी हैं देव, गुरू और धर्म पर आस्था। अर्थात जिसकी देव पर, गुरू पर, धर्म पर प्रगाढ आस्था हो। मुलतः हर श्रावक सोचे अनन्त काल से चल रहा यह संसार का परिभ्रमण कब रूकेगा? कैसे रूकेगा? मोक्ष की प्राप्ति कैसे होगी? यह भी सम्यक्त्व की पहचान हो सकती है। इतना होनें पर भी हमारे जीवन में कुछ परिवर्तन आने चाहिए। भगवान ने सम्यक्त्व के 5 लक्षण बताये हैं-षम, संवेग, निर्वेद, अनुकम्पा और आस्तिक्य।जो व्यक्ति क्षायिक सम्यक्त्वी नहीं हैं तो यह गारंटी भी नहीं कि वो मोक्ष जायेगा। हम सभी क्षायोपषमिक सम्यक्त्व के धनी हैं। इसके अतिरिक्त यदि कोई भवी है तो वह मोक्ष जायेगा ही। कोई व्यक्ति भवी पुरूषार्थ से नहीं होता बल्कि यह पारिणामिक भाव हैं। सत्यपुरूषार्थ से व्यक्ति को सम्यक्त्व प्राप्त हो सकता हैं इसलिए यह चितंन करना चाहिए कि सम्यक्त्व हैं तो कितना निर्मल हैं।