Thursday, 22 August 2019
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लालीवाव मठ में भागवत सप्ताह की धूम

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर झूमे श्रद्धालु, बधाइयों और भजनों ने श्रद्धा के रंग बरसाये

बांसवाडा, २५ जुलाई/भागवत कथामर्मज्ञ, लालीवाव मठाधीश महंत हरिओमशरणदास महाराज द्वारा गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अंतर्गत यहां लालीवाव मठ में चल रहे श्रीमद भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन बुधवार को श्री कृष्ण जन्मोत्सव की मनोहारी झांकियों पर श्रद्धालु मुग्ध हो उठे।
भागवत कथा रसास्वादन के बीच जैसे ही भगवान श्री कृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग आया, श्री कृष्ण जन्म की झांकियों ने पूरे माहौल में श्रद्धा और आनन्द का दरिया बहा दिया। और वातावरण ’’नंद के आनंद भयो जय कन्हैयालाल की...‘‘ के स्वरों पर गूंज उठा।
भगवान के जन्म अवसर पर श्रद्धालु महिलाओं ने भक्तिभाव के साथ लोरी, बधाइयां और झुला गाया। और भगवन नाम उच्चारण करते हुए संकीर्तन कर आनन्द बरसा दिया।
ढेर लगा प्रसाद का
श्री कृष्ण जन्म के मौके पर केले, लड्डू, पंजरी, मेवा मिष्ठान, खोपरापाक आदि के ढेर लग गए। श्रद्धालुओं द्वारा कृष्ण जन्म पर लाई गई सैकडों चॉकलेट्स प्रसाद के रूप में वितरित की गई। भगवान की पूजा-आरती व शालीग्राम अभिषेक पंडित विमल भट्ट ने किया।
बही भजनों की गंगा
इस अवसर पर भजनों ने माहौल में भक्ति भाव के कई रंग घोल दिए। भजन कलाकरों ने हारमोनीयम पर पंडित गणेशलाल शर्मा, वायलीन पर सोहनलाल तथा अन्य वाद्यों पर दूसरे कलाकारों ने संगत की। इन भजनों में ’तेरे द्वार खडा भगवान भगत भर दे रे झोली...‘ पर श्रद्धालु झूमते हुए नाच उठे।
भागवत कथा प्रसंगों की श्रंखला
भागवत ज्ञान सप्ताह के चौथे दिन बुधवार को भागवतकथा मर्मज्ञ लालीवाव पीठाधीश हरिओम शरणदास महाराज ने जडभरत, अजामिल, वृत्रासुर, प्रहलाद, समुद्र मंथन, चंद्र सूर्य व मिनी वंश के राजाओं का चरित्रा और नवम स्कंध की विभिन्न कथाओं पर प्रवचन किया।
इस अवसर पर लालीवाव मठाधीश ने कहा कि परमात्मा से जुडकर ही जीव शाश्वत आनंद पा सकता है। इसके बगैर आनंद की कल्पना तक संभव नहीं है। आज जीवात्मा समस्याओं, दुःखों, संत्राासों आदि में भटक रहा है। ऐसे में उसे भगवान की शरण में ही सभी सुख प्राप्त हो सकते है।

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