Thursday, 22 August 2019
khabarexpress:Local to Global NEWS
  4119 view   Add Comment

जीव जाए तो पुण्य की कमाई से भरपूर हो - संत हरिओमशरणदास महाराज

लालीवाव मठ में श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ में श्रद्धालुओं का जमघट

बांसवाडा, २३ जुलाई/ऐतिहासिक एवं प्राचीनतम लालीवाव मठ के मठाधीश महन्त हरिओमशरणदास महाराज ने कहा है कि आत्मकल्याण एवं विश्व कल्याण के लिए शुचिता, निष्काम भक्तिभावना, लोक मंगल और परोपकार की दृष्टि होने के साथ ही सदैव अपने आत्मस्वरूप में स्थित रहने की आवश्यकता है। संत हरिओमशरणदास महाराज ने लालीवाव मठ में गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अन्तर्गत आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन सोमवार को व्यासपीठ से भागवत कथाअमृत वृष्टि करते हुए यह उद्गार व्यक्त किये। बडी संख्या में श्रद्धालुओं के मध्य भागवत ज्ञान सुधा वृष्टि करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन के लक्ष्य और मानव देह प्राप्ति के मर्म को समझ कर ही कल्याण की राह पायी जा सकती है। इसके लिए संसार में अनासक्त रहने, परमात्मा के साथ सतत संबंध कायम रखने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। दुःखों से मुक्ति के लिए भगवान का स्मरण करने पर जोर देते हुए उन्होंने धर्मावलम्बियों से कहा कि कलियुग में भगवान की भक्ति, भगवत नाम स्मरण, कीर्तन और परमात्मा के प्रति अगाध श्रद्धा भाव सर्वश्रेष्ठ और सहज-सरल उपाय है जिससे दैहिक, दैविक और भौतिक तापों का शमन होता है और दिव्यत्व के साथ दैवत्व की प्राप्ति होती है। सत्संग और स्वाध्याय को ज्ञान मार्ग का सहज माध्यम निरूपित करते हुए भागवत कथाकार संत हरिओमशरण दास महाराज ने कहा कि वेद, उपनिषद, गीता आदि ग्रंथों का पठन-पाठन, मनन एवं चिन्तन, भागवत कथा का नियमित श्रवण करने से वासना का त्याग होता है और मदिरा पान, काम, क्रोध, लोभ, मोह आदि षडविकार और पापों का नाश होता है तथा प्राणी पुण्योपलब्धि करता है। उन्होंने कहा कि जीवन का लक्ष्य ईश्वर प्राप्ति होना चाहिए। यह शरीर रथ है, बुद्धि शरीर रूपी रथ को चलाने वाली है। जीव अकेला आता है, अकेला जाता है। कोई साथ नहीं देता। इसलिए स्व विवेक से परमार्थ में जुटना और निष्काम सेवा करने का व्रत अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने कलियुग से बचने के लिए भगवान नाम को मूलाधार बताते हुए कहा कि जुआ,वैश्यावृत्ति, माँस-मदिरा, पशुओं का वध एवं स्वर्ण में कलियुग का वास होता है। इसके साथ ही उन्होंने झूठ को सबसे बडे पाप की संज्ञा दी और कहा कि ज्ञान एवं जीवन की सद्गति सद् कर्मों से ही होती है। इसलिये मनुष्य को प्रयत्नपूर्वक बुरे कर्मों को तिलांजलि देकर अच्छे कर्मों को आचरण में अपनाना चाहिए।
बुधवार को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव
श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के अन्तर्गत २५ जुलाई, बुधवार को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव होगा। इसे उत्सवी स्वरूप में मनाया जाएगा। लालीवाव मठ में भागवत कथा २८ जुलाई तक चलेगी। इसका समय रोजाना अपराह्न २ से ५ बजे तक का है। कथा में बडी संख्या में श्रद्धालु हिस्सा ले रहे हैं।

Share this news

Post your comment