Tuesday, 24 October 2017

टीना अंबानी पहुंची आचार्य तुलसी केन्द्र

पांच बहिनों एवं परिजनों के साथ नैतिकता का शक्तिपीठ पहंुच कर आचार्य तुलसी को श्रद्धांजलि एवं भावांजलि अर्पित की

बीकानेर, अंबानी परिवार की टीना अंबानी अपनी पांच बहिनों एवं परिजनों के साथ “नैतिकता का शक्तिपीठ“ पहंुच कर आचार्य तुलसी को श्रद्धांजलि एवं भावांजलि अर्पित की। इस अवसर पर टीना अंबानी ने कहा कि यहां आकर शांति की अनुभूति हो रही हैं।
टीना अंबानी ने नैतिकता के शक्तिपीठ पर साहित्य साधना में रत महाश्रमणी साध्वी प्रमुखा के दर्षन किए चरण स्पर्ष किए तथा लगभग 50 मिनट तक कनकप्रभाजी से जैन धर्म, दर्षन एवं साध्वियांे की जीवन शैली के बारे में जानकारी प्राप्त की। साध्वी प्रमुखा कनकप्रभाजी ने उन्हें बताया कि भगवान महावीर के हम अनुयायी है तथा हमारे वर्तमान के आचार्य महाश्रमणजी दिल्ली की तरफ पदयात्रा कर रहें हैं। उन्हांेने बताया कि साधु जीवन संयम, तपस्या एवं त्याग का जीवन हैं।
टीना अंबानी ने पूछा कि कितने वर्ष की थी तब आपने दीक्षा ग्रहण की तो साध्वी प्रमुखा ने बताया कि 15 वर्ष की उम्र मे मुमुक्षु बनी तथा 19 वर्ष की उम्र में दीक्षा ली। साध्वी कल्पलता ने बताया कि 30 वर्ष की उम्र में कनकप्रभा  ाध्वियों की प्रमुखा बन गई तथा हिन्दी, संस्कृत, प्राकृत, अंग्रेजी भाषा में पारंगत हैं। टीना अंबानी एवं उनकी बहनों ने भिक्षा के बारे में पुछते हुए कहा कि क्या आपका भोजन अलग बनता हैं ? तब उन्होंने अपने भिक्षा के पात्र बताते हुए कहा कि घर-घर जाकर भिक्षा ग्रहण करते हैं और अगर हमारे लिए ही कोई व्यक्ति भोजन बना लेता है तो वहां से भिक्षा नहीं ले सकते। उन्हें बताया कि जिस प्रकार गाय एक जगह सारा घास न खाकर थोड़ा ऊपर से घास चरकर अपना पेट भरती है उसी प्रकार साधु साध्विायों के आहार प्राप्त करने की विधि को “गोचरी“ कहते हैं। हम अपने भोजन में से कुछ भाग भिक्षा देने वालों से थोड़ी थोड़ी भिक्षा इकट्टी करके भोजन करते है।
टीना अंबानी ने पूछा कि आप अठाई, पयुर्षण व प्रतिक्रमण भी करते है क्या ? तब साध्वीप्रमुखा ने बताया कि प्रतिदिन सुबह-षाम प्रतिक्रमण करते हैं तथा तपस्या में तो अठाई से भी अधिक की दीर्घ तपस्या करने वाली साध्वियां हुई है। पयुर्षण प्रतिवर्ष भाद्र माह में मनाया जाता हैं।
साध्वी सुनंदा श्री एवं अन्य साध्वियों ने बताया कि अणुव्रत, प्रेक्षाध्यान व जीवन विज्ञान पर आचार्य श्री महाश्रमण एवं साध्वी प्रमुखा कनक प्रभाजी के सान्निध्य में लगभग 800 साधु-साध्वीयां श्रमण-श्रमणियां कार्य कर रही हैं।
साध्वी कल्पलता ने उनको बताया कि कनकप्रभा कवि, लेखक, व्याख्यानकार एवं प्रख्यात साहित्यकार हैं तथा अभी आचार्य तुलसी वांगमय के लेखन के कार्य में लगे हुए हैं। टीना अंबानी ने बताया कि वे 8 बहने हैं। जिसमें से आज 6 बहिनें यहां उपस्थित है जब परिचय में बहिनों के नाम में भावना, प्रज्ञा, क्षमा इत्यादि बताया तो साध्वी प्रमुखा ने पूछा आपका टीना नाम कैसे रखा तो टीना ने बताया कि मेरा नाम “निवृती“ है तो उन्होने कहा सभी बहिनो के नाम जैन संस्कृति पर हैं। तो टीना ने कहा कि दो बहिनों की शादी जैन परिवार में हुई हैं तथा पापा की मम्मी के पीहर वाले जैन हैं। संगोष्ठी में विसर्जन पर चर्चा करते हुए साध्वीप्रमुखा ने कहा कि भगवान महावीर ने असीम संग्रह व भोग नहीं करने का उपदेष दिया तथा अर्थ संग्रह में भी सीमा की जाये ताकि देष की व्यवस्था ठीक चल सके।
कनक प्रभाजी ने उन्हंे कहा कि व्यक्ति को स्वार्थी नहीं होना चाहिए परमार्थी बनना चाहिए तथा समाज व देष के लिए कुछ करना चाहिए। साध्वीयो ने जब उन्हंे बताया कि साध्वी प्रमुखा ने लगभग 80 हजार कि.मी की पैदल यात्रा कर ली है तो सुनकर आष्चर्य व्यक्त किया। उन्हें बताया गया कि जैन साधु साध्वियां सर्दी में हीटर एवं गर्मी में कूलर, ऐसी, इत्यादि का प्रयोग नहीं करते हैं।

Tina Ambani Visited Acharya Tulsi Center at Bikaner and met Jain Monks
साध्वियों की जीवन चर्या के बारे में यह जानकर सुखद अनुभूती व्यक्त की कि साध्वियां उच्च षिक्षा प्राप्त हैं तथा चित्रकला व लिपिकला में पारंगत है। उन्हांेने साध्वियो द्वारा हाथ से सिले कपडे़ देखे, अक्षरों के नाम की लिपि देखकर निहारती रहीं। साध्वीयो ने उन्हें हस्तनिर्मित वस्तुएं एवं खाने के पात्र भी दिखाये। टीना व उनकी बहनें एक पेज में हाथ से लिखी भगवत् गीता को देखकर आष्चर्य चकित रह गई और पुछा कि किसने लिखा तो साध्वी  ने बताया कि मुनि श्री ने लिखा है जो अब वृद्ध हो गए हैं। साध्वी प्रमुखा ने महीन अक्षरों में कलात्मक ढंग से लिखे शब्दों को बताते हुए कहा कि आपकी परीक्षा हैं कि क्या लिखा हुआ हैं टीना अंबानी ने काफी प्रयास किया फिर बताया कि “श्री तुलसी“ लिखा हुआ हैं। टीना व उसकी बहनें केष लूंचन की पद्धति सुनकर सिहर उठी और कहा बहुत कठिन चर्या हैं।
साध्वी प्रमुखा  ने कहा कि भगवान महावीर ने जातिवाद को महत्व नहीं दिया, किसी भी जाति, रंग, देष का व्यक्ति जो आत्मा व पुनर्जन्म में तथा अच्छा जीवन जीने में विष्वास रखता हो जैनी बन सकता हैं। उन्होने कहा कि जैनत्व के मुख्य सिद्धान्त है कि किसी को कष्ट नहीं देना, चोरी नहीं करना, झूठ नहीं बोलना, पवित्र जीवन जीना, असीम भोग व संग्रह नहीं करना हैं।
टीना अंबानी बीकानेर निजि यात्रा पर आयी है तथा 8 बहनों एवं एक भाई में से 6 बहनें एक साथ यहां पहुंची। उन्होंने आचार्य तुलसी शांति प्रतिष्ठान की गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की। महामंत्री लूणकरण छाजेड़, कोषाध्यक्ष जतनलाल दूगड़, पूर्व कोषाध्यक्ष सुरेन्द्र बोथरा, कनक चौपड़ा, पद्म बोथरा, संजय बोथरा, एवं अनेक श्रावक श्राविकाएं उपस्थित थी। टीना अंबानी को छाजेड़ एवं बोथरा ने साहित्य भेंट कर सम्मानित किया।

Tina Amabani   Acharya Tulisi   Sadhvi Kanakprabha