Friday, 19 July 2019
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बुरे का भी करो भलाः जिनरत्नविजय

रांगडी चौक स्थित तपागच्छ पौषधशाला में मुनिश्री जिनरत्नविजय ने कर्मसत्ता की महत्ता बताई।

बीकानेर। रविवार को रांगडी चौक स्थित तपागच्छ पौषधशाला में मुनिश्री जिनरत्नविजय ने कर्मसत्ता की महत्ता बताई। मुनिश्री ने कहा कि कर्मसत्ता के प्रभाव से मनुष्य को दुख-सुख प्राप्त होते हैं। जैसा कर्म किया है वैसा फल भुगतना होगा। कर्मसत्ता के लेखे को कोई टाल नहीं सकता। व्यक्ति के जीवन में दुख-सुख आते-जाते रहने से संघर्ष परिभाषित होता है। उतार-चढाव से ही व्यक्ति को अनुभव की प्राप्ति होती है। चार प्रकार का मनुष्य स्वभाव होता है। प्रथम- ‘जो उपकारी पर उपकार करे।’ भला करने वाले का भला जो करता है उसे उपकारी पर उपकार कहते हैं। अच्छा करने वालों का अच्छा हर कोई करता है। दूसरा- ‘उपकारी पर अपकारी।’ इसका अर्थ है कि भला करने वाले का भी बुरा करना। अच्छा कार्य कर रहा है उसके बारे में गलत करना, गलत कहना। तीसरा- ‘अपकारी पर उपकार।’ इसका आशय यह है कि बुरा कर रहा है उसका भी भला करना। जो व्यक्ति आपका भला नहीं चाहता, आपको संकटग्रस्त करना चाहता है उसका भी यदि कोई भला करता है तो वह उक्त श्रेणी में आता है। चौथा प्रकार है-  अपकारी पर अपकार यानि बुरे का बुरा करना। इस प्रकार के लोग बहुत अधिक मिल जाते हैं। जो आपका बुरा करता है, आप तत्पर हो जाते हैं उसका बुरा करने के लिए। अच्छा और भला व्यक्ति कभी भी, किसी भी स्थिति में और किसी का भी बुरा नहीं करता। बुरा करने के लिए मन में द्वेष, कटुता और वैमनस्य भरना होगा तभी बुराई होती है। रविवार को नवकार कलश शिखरचंद लालचंद डागा के यहां स्थापित हुआ तथा दिनभर इनके यहां नवकार मंत्र के जाप हुए। आज से पर्यूषण पर्व प्रारंभ हो गए हैं। जैन समाज में पर्यूषण पर्व की तैयारियों उल्लास व उमंग से चल रही है।

Jinratna Suriwsar, Bikaner Jain, Paruyshan Parv,

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