Tuesday, 20 August 2019
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लालीवाव मठ में गुरु पूर्णिमा पर बहुआयामी आयोजनों में श्रद्धालुओं का सैलाब उमडा

बांसवाडा, २९ जुलाई/प्राचीनतम एवं ऐतिहासिक महत्व के प्रसिद्ध लालीवाव मठ में गुरु पूर्णिमा महोत्सव रविवार को गुरु पादुकापूजन व अन्य अनुष्ठानों के साथ ही विभिन्न आयोजनों के साथ श्रद्धापूर्वक मनाया गया।
प्रभात से ही लालीवाव मठ में वागड अंचल तथा पडोसी राज्यों सहित देश के विभिन्न स्थानों से श्रद्धालुओं के आवागमन का दौर यौवन पर रहा।
इन श्रद्धालुओं ने लालीवाव मठाधीश, जाने-माने अध्यात्मचिन्तक हरिओमशरणदास महाराज के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद ग्रहण किया और विभिन्न उपचारों के साथ भक्तिभावपूर्वक गुरुपूजन किया। श्रद्धालुओं ने पुष्पों, फल-फलादि, मिष्ठान्न, दक्षिणा आदि के साथ चढावा चढाया। मठाधीश हरिओमश् ारणदासजी महाराज ने भक्तों को प्रसाद दिया तथा यशस्वी जीवन के लिए आशीर्वाद प्रदान किया।
दीक्षा पाने उमडा श्रद्धालु समुदाय
लालीवाव मठ में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर दीक्षा पाने श्रद्धालुओं का जमघट लगा रहा। लालीवाव मठाधीश महन्त हरिओमशरणदासजी महाराज ने मठ की परम्पराओं के अनुसार श्रद्धालुओं को दीक्षा प्रदान की। दीक्षा की संकल्प विधि जाने-माने प्राच्यविद्यामर्मज्ञ, गायत्री मण्डल के अध्यक्ष ब्रह्मर्षि पं. महादेव शुक्ल ने पूरी करायी।
महन्त का अभिनंदन
लालीवाव मठ में रविवार को आयोजित समारोह में ज्योतिष, कर्मकाण्ड, तंत्र-मंत्र, वेद आदि के विद्वानों की ओर से गायत्री मण्डल के अध्यक्ष एवं वयोवृद्ध प्राच्यविद्यामर्मज्ञ ब्रह्मर्षि पं. महादेव शुक्ल ने धर्म-अध्यात्म क्षेत्र म उल्लेखनीय योगदान के लिए शॉल ओढाकर लालीवाव पीठाधीश्वर महन्त हरिओमश् ारणदास महाराज का अभिनंदन किया। इस दौरान् पंडतों ने पुरुष सूक्त तथा अन्य वैदिक स्वस्ति ऋचाओं से महन्त का अक्षताभिषेक किया।
मठाधीशों का स्मरण, गुरु पादुका पूजन
लालीवाव में रविवार को मठाधीश हरिओमशरणदास महाराज ने प्रभातकाल में अपने गुरु महन्त नारायणदास महाराज तथा पूर्ववर्ती मठाधीशों की मूर्तियों का प्रक्षालन तथा गुरु पूजन परम्पराओं के अनुरूप गुरु पादुका पूजन किया। दिन में बडी संख्या में श्रद्धालुओं ने भी मठाधीशों व महन्तों की मूर्तियों की पूजा की और पुष्पहार चढाए।
महन्त का वार्षिक प्रवचन
गुरु पूर्णिमा पर भक्तों के सम्मुख वार्षिक प्रवचन करते हुए लालीवाव मठाधीश महन्त हरिओमशरणदासजी महाराज ने माता-पिता और गुरु के प्रति श्रद्धा-आस्था का भाव रखने, उनको सेवा से संतुष्ट करने, गुरु प्रदत्त मंत्र का नियमित जाप, जीवन के प्रत्येक कर्म में शुचिता रखने, सत्संग और साधना को जीवन की आदत बनाने, मनोमालिन्य और कुविचारों तथा मलीन कर्मों से दूर रखने आदि के उपदेश दिए।
उन्होंने कहा कि गुरु का महत्व तभी है जब जीवात्मा परमात्मा के पास जाने योग्य हो जाए। केवल दीक्षा देकर धन-वैभव और प्रतिष्ठा की एषणाओं को परिपुष्ट करने वाला व्यक्ति गुरु हो ही नहीं सकता। उन्होंने कहा कि गुरु समदर्शी होता है। उसके लिए राजनेता और धनाढ्य या निर्धनतम व्यक्ति में कोई फर्क नहीं होता।
महन्त ने भक्तों से कहा कि वे प्रलोभन और लोभ के मोह को तिलान्जलि दें तथा सनातन धर्म के बताए आदर्शों और मार्गों पर चलकर अपने आपको उदार और व्यापक बनाएं तथा प्रभु से मिलन की यात्रा को तेज करें। यही जीवन का लक्ष्य है। इसके साथ ही लोक मंगल और समाज के कल्याण में भी अपना भरपूर योगदान दें।
अनुष्ठान चले, श्रीविग्रहों का मनोहारी श्रृंगार
लालीवाव मठ में गुरुपूर्णिमा के मौके पर हनुमान, शिव, पद्मनाथ, भजलेराम, जानकी आदि तमाम मन्दिरों में भगवान के श्रीविग्रहों का मनोहारी श्रृंगार किया गया तथा इन मन्दिरों में विशेष अनुष्ठान और पूजाएं हुई।

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