Monday, 18 November 2019
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विभिन्न धर्मो के प्रमुख धर्माचार्य एक मंच पर एकत्रित हुये

गुरू संगमम् का द्वितीय अधिवेशन सम्पन्न

नई दिल्ली, राजधानी के त्यागराज स्टेडियम में आयोजित गुरू संगमम् के द्वितीय अधिवेशन पर श्रीसद्गुरू जग्गीवासुदेव, जगद् गुरू शिवरात्रि देशी केन्द्र महास्वामी, जगद्गुरू रामानंदाचार्य स्वामी हंसदेव, परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानन्द सरस्वती, अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक आचार्य डॉ. लोकेश मुनि सहित देश के अनेक हिस्सों से विभिन्न धर्मो के लगभग 250 प्रमुख धर्माचार्य एकमंच पर एकत्रित हुये। 
दिन भर चले अधिवेशन को सम्बोधित करते हुए गुरू जग्गीवासुदेव ने कहा कि अध्यात्म और विज्ञान एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। सत्य की खोज दोनों का लक्ष्य है। हमें भारत को अध्यात्म का द्वार बनाना है, व्यक्ति के अध्यात्मिक विकास से ही समाज में व्याप्त अनेक बुराईयाँ स्वतः ही समाप्त हो सकेगी।
अहिंसा विश्व भारती के संस्थापक आचार्य डॉ. लोकेश मुनि ने कहा कि धर्म हमें जोडना सिखाता है, तोडना नहीं। धर्म के क्षेत्र में, हिंसा, घृणा, भय और नफरत का कोई स्थान नही है। उन्होंने कहा कि अनेक दल मिलकर पांच साल तक सरकार साथ चला सकते हैं तो सभी धर्मों के धर्माचार्य एक साथ मिलकर कार्य क्यों नहीं कर सकते? आचार्य लोकेश ने आशा व्यक्त कि गुरू संगमम् के प्लेट फार्म के माध्यम से सभी धर्माचार्य मिलकर भारत को विश्व में अध्यात्मिक शक्ति के रूप में प्रतिष्ठित कर सकेंगे। 
जगद् गुरू शिवरात्रि देशीकेन्द्र महास्वामी ने कहा कि भारत में ज्ञान-विज्ञान का महान भण्डार मौजूद है, अपेक्षा है उसे आधुनिक भाषा एवं संदर्भों में प्रस्तुत करने की, जिससे हमारी महान आध्यात्मिक विरासत से सम्पूर्ण दुनिया लाभ उठा सके।
जगद्गुरू रामानंदाचार्य स्वामी हंसदेव कहा कि आज समूची दुनिया, युद्ध, हिंसा, एवं आतंकवाद से भयाक्रांत है किन्तु हिसंा एवं आतंक किसी समस्या का समाधान नहीं है। विकास के लिये शांति आवश्यक है। गुरू संगमम् का मंच भारत में अहिंसा, शांति और सद्भावना के संवर्द्धन के लिये अलख जगायेगा।
परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि गुरू संगमम् सम्प्रदायविहीन एक अभिनव धर्म क्रांति की घोषणा है। इससे किसी भी धर्म का व्यक्ति जुडकर अध्यात्म के माध्यम से सम्पूर्ण विश्व में आध्यत्मिक चेतना को जगाने का कार्य कर सकेगा।
इस अवसर पर इस्कॉन के महामंत्रदास,आचार्य रूपचन्द्र मुनि, अमरेन्द्र मुनि विवेक मुनि, महामण्डेलश्वर महेश्वरानंद गिरि (राजस्थान), स्वामी अध्यात्मानंद सरस्वती (गुजरात), स्वामी प्रभाकरण नंदा सरस्वती (केरल), निमिशानन्दा गुरू(कर्नाटक), बालाऋषि विश्वासरासिनी (तमिलनाडु), स्वामी आत्म चेतनय जी, स्वामी संजीव शिवयोग, (पंजाब) आदि ने अपने विचार व्यक्त किये। 
Gurus from various Religion

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