Friday, 13 December 2019
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भारतीय जनमानस के महानायक कृष्ण

भगवान कृष्ण का जो प्रभाव भारतीय जनमानस पर है वह शायद ही किसी और अवतार का देखने को मिले। कृष्ण का पूरा जीवन ही लीलाओं व किस्सों व कहानियों से भरा पडा है। कृष्ण जन्म से ही भारतीय जनमानस से जुडे नजर आते हैं और मोक्ष पर्यन्त वे पूरी तरह से जुडे रहते हैं।

हिन्दू धर्म में तैंतीस करोड देवी देवताओं के बारे में बताया गया है। इस तैंतीस करोड में भगवान विष्णु के चौबीस अवतार हैं जिनका अपना विशिष्ट स्थान इस धर्म में है। वैसे तो सभी देवी देवताओं का समान आदर व सम्मान किया जाता है लेकिन जो स्थान कृष्ण को प्राप्त है वह शायद ही किसी देवी या देवता को प्राप्त हो। कृष्ण को आज तक के विष्णु के अवतारों में से सम्पूर्ण अवतार के रूप में देखा जाता है। अगर भगवान कृष्ण को भारतीय जनमानस का महानायक कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। 
इस बात को अगर इस दृष्टिकोण से देखे कि जितनी धूमधाम व उत्साह से कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है उतनी धूमधाम से व उत्साह रामनवमी का उत्सव नहीं होता। मेरे कहने का यह कदापि मतलब नहीं है कि राम को मानने वाले कम हैं या राम का महत्च नहीं है लेकिन व्यवहार में अगर देखें तो मेरी बात शायद सब को सही भी लगे। जो महौल पूरे देश में कृष्ण जन्माष्टमी को होता है वह किसी भी अवतार के जन्मदिवस पर नहीं होता। कृष्ण भगवान विष्णु का सम्पूर्ण अवतार अर्थात सोलह कलाओं से युक्त पूर्ण अवतार माना गया है। कृष्ण के अनुयायी भी बडी मात्रा में हिन्दू धर्म में आपको मिल जाएंगे और यही एक बडा कारण है कि कृष्ण जन्म की जो गूंज सुनाई देती है वह किसी ओर की सुनाई नहीं देती।
भगवान कृष्ण का जो प्रभाव भारतीय जनमानस पर है वह शायद ही किसी और अवतार का देखने को मिले। कृष्ण का पूरा जीवन ही लीलाओं व किस्सों व कहानियों से भरा पडा है। कृष्ण जन्म से ही भारतीय जनमानस से जुडे नजर आते हैं और मोक्ष पर्यन्त वे पूरी तरह से जुडे रहते हैं। जन्म के समय जेल के सारे दरवाजों के तोडने से शुरू होता उनका सफर भील के तीर से मोक्ष तक कायम रहता है। वह अपने पूरे जीवन में भारतीय जनमानस का प्रतिनिधित्व करते दिखाई देते ह। बचपन से ही अपनी लीलाओं से प्रभावित करते है और ग्वाल बाल सहित गोपियों को व अपने नंदगाँव के हर व्यक्ति पर अपनी छाप छोडते हैं। वास्तव में कृष्ण के पूरे चरित्र से जुडा हर व्यक्ति भारत के हर वर्ग का प्रतिनिधित्व करता दिखाई देता है। बचपन में इंद्र का घमण्ड तोडकर गोवर्धन पर्वत की पूजा करवाने की बात में वे किसानों के व ग्रामीणों का प्रतिनिधित्व देवताओं के सामने करते हैं तो किशोरावस्था में कंस का वध कर पूरे समाज को व अपने परिवार को अन्याय से मुक्त करवाते ह। आगे चलकर गीता का संदेश जहाँ पूरी मानवता को संदेश है वहीं गरीब सुदामा का प्रकरण एक आम गरीब आदमी को संदेश देता है कि अगर कृष्ण के प्रति उसका समर्पण है तो उसका दरीद्र दूर हो जाएगा। बचपन से लेकर अंत तक कृष्ण का जीवन पूरी भारतीयता को समर्पित है और नेतृत्व करता है कि भारत का हर वर्ग कृष्ण से जुडा है। 
 एक राजपरिवार में पैदा होकर दूसरी माँ के पास बडा होना और ये संदेश देना कि माता का प्यार सिर्फ पैदा होने से नहीं भाव से भी मिलता है। कृष्ण ने अपने जीवन में प्रत्येक घटना से संदेश दिया है कि मानव कल्याण से बडा कोई काम नहीं है और धर्म व सत्य के मार्ग पर चलने वाला कभी हारता नहीं। कृष्ण का जीवन यहाँ तक संदेश देता है कि अगर हालात इतने बिगड गए कि मनुष्य की पहच से बाहर हो गए तो भगवान स्वयं धर्म की स्थापना करने के लिए और पापियों का विनाश करने के लिए धरती पर आएंगे जरूरत है सिर्फ विश्वास की और धर्म की।
 कृष्ण अपने पूरे अवतार में कहीं योगी दिखाई देते हैं तो कहीं रसिक तो कहीं कूटनीति करते नजर आते है तो कहीं चमत्कार करते, कहीं कृष्ण अपनी मर्यादा को भूलकर भीष्म के सामने शस्त्र भी उठाते हैं तो कहीं भक्त की पुकार पर द्रोपदी का चीर भी बचाते हैं। इस प्रकार मानव जीवन की हर घटना कृष्ण के जीवन से जुडी नजर आती है।
 मनुष्य जीवन के जितने आयाम है वे जितने कृष्ण जन्म में दिखाई देंगे उतने किसी विष्णु अवतार में देखने को नहीं मिलते। प्यार, श्रद्धा, समर्पण, त्याग, योग सहित सारी सिद्धियों व निधियों से परिपूर्ण कृष्ण वास्तव में पूरे भारतीय जनमानस के एक महानायक के रूप में प्रकट होते है।


 

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