बीकानेर। अजित फाउण्डेशन में शुक्र पारगमन सौरमण्डल की घटना पर द्वारका प्रसाद माथुर, विशेषज्ञ तथा मो.फारूक, विशेषज्ञ ने जानकारी दी। द्वारका प्रसाद उन्होंने बताया कि 6 जून को शुक्र का सूर्य पर दुर्लभ पारगमन होगा और इस घटना को पूरे देश में देखा जा सकेगा। उन्होंने पारगमन पर बोलते हुए बताया कि जब चांद, पृथ्वी और सूर्य के बीच में आता है तो इसे सूर्य ग्रहण कहा जाता है। मगर शुक्र या बुध जैसे आंतरिक ग्रह पृथ्वी और सूर्य के बीच आते है तो यह घटना पारगमन कहलाती है। धरती से देखने पर शुक्र और बुध ग्रह का आकार चांद के मुकाबले बहुत छोटा है। इसलिए जब ये सूर्य के सामने से गुजरते है तो एक छोटे से काले बिंदु जितना ही आकार बना पाते है। मो. फारूक ने शुक्र पारगमन के बारे में बताते हुए कहा किजब शुक्र ग्रह सूर्य के सामने से होकर गुजरता है ता यह घटना शुक्र पारगमन कहलाती है। इस घटना के समय शुक्र ग्रह एक छोटे काले चक्के जैसा धीरे-धीरे चलता हुआ दिखाई देगा। शुक्र का पारगमन बुध के पारगमन की तुलना में बहुत दुर्लभ है। बुध के पारगमन की बात रकें तो यह औसतन एक शताब्दि में तेरह बार होता है जबकि शुक्र पारगमन 243 सालों में केवल चार बार ही होता है। यह घटना जोड़े मेंहोती है, दो पारगमन 8 साल के अंतराल में होती है और अगलेदो पारगमन एक शताब्दि से भी अधिक समय बाद होती है। इस अवसर पर द्वारका प्रसाद माथुर ने शुक्र पारगमन को किस प्रकार देखना है उसकी तकनीकि के बारे में बताया साथ ही इस घटना को किस चश्मे के द्वारा देखना है उसके बारे में भी विस्तार से बताया। कार्यक्म के अंत में अन्तर्राष्टीय शतरंज प्रशिक्षक शंकरलाल हर्ष ने आए हुए आगन्तुकों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
|