बीकानेर, जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ संघ वरिष्ठ साध्वी, बीकानेर मूल की प्रवर्तिनी (जैनाचार्य के समकक्ष पद प्राप्त) साध्वी चन्द्र प्रभा श्रीजी म.सा. अपनी सहवृति नौ साध्वियों के साथ व धार्मिक शोभायात्रा के साथ गुरुवार को चातुर्मासिक के लिए नगर प्रवेश किया। साध्वी के 11 वर्ष के बाद होने वाले चातुर्मासिक नगर प्रवेश की शोभायात्रा में बीकानेर जिले, के विभिन्न स्थानों, प्रदेश के फलौदी, कोटा, भवानी मंडी जयपुर, रामगंज मंडी, विभिन्न इलाकों के साथ दिल्ली, कोलकाता, तमिलनाडू, मध्यप्रदेश में इंदौर, विजयवाड़ा, छापीहेड़ा व दिल्ली सहित देश के अनेक इलाकों से श्रावक-श्राविकाएं शामिल हुए। नगर के विभिन्न जैन बहुल्य मोहल्लों से निकली शोभायात्रा में साध्वीवृंद का जगह-जगह वंदन व अभिनंदन किया गया। शोभायात्रा में शामिल श्रावक-श्राविकाओं का शर्बत, अल्पहार व शीतल जल से सत्कार किया गया। अनेक स्थानों पर स्वागत द्वार बनाए गए तथा पोस्टर व बैनर लगवाए गए। गाजे बाजे से निकली शोभायात्रा में दो बैंड पार्टियां नवंकार महामंत्रा की धुन बजा रहीं थी। वहीं श्रावक-श्राविकाएं भगवान महावीर, जैन धर्म तथा देव, गुरु व आचार्य तथा प्रवर्तिनी साध्वी चन्द्रप्र्रभा म.सा. के जयकारे लगा रहे थे। घोड़े पर सवार एक युवक पंचरंगी ध्वज फहरा रहा था। विचक्षण महिला मंडल की सदस्याएं एक सी पोशाक में भक्तिगीत गा रहीं थी। शोभायात्रा में दादा गुरुदेवों व भगवान महावीर के आदमकद चित्रा भी ठेलों पर प्रतिष्ठित थे। कुछ भजन मंडलियां भक्ति गीत गा रहीं थी। शोभायात्रा जैन मोहल्लों के प्रमुख मंदिरों यथा चिंतामणि जैन मंदिर, आदिनाथ जैन मंदिर, महावीर मंदिर के आगे से निकली । मंदिरों में साध्वीवृंद व श्रावक-श्राविकाओं ने शीश झुकाई। गोगागेट से रवाना हुई शोभायात्रा राजीव गांधी मार्ग के सामने के बाबूजी प्लाजा के कला मंदिर पहुंची जहां भक्तामर का पाठ हुआ। मुकीम बोथरा मोहल्ला, चिंतामणि जैन मंदिर, आदि नाथ जैन मंदिर, नाहटा मोहल्ला, गोलछा मोहल्ला, खजांची मोहल्ला, रामपुरिया मोहल्ला, आसानियों का चैक, सिपानी मोहल्ला, बैंदों का चैक, महावीरजी का मंदिर, सुराणा मोहल्ला, सुपारी बाजार, बच्छावतों का मोहल्ला, ढ्ढ्ढों का चैक, बेगाणी चैक, कोचरों का चैक, सेठिया डागा पारख मोहल्ला, कोठारी मोहल्लाहोते हुए रांगड़ी चैक के सुगनजी महाराज के उपासरे में धर्म सभा में परिवर्तित हो गई। धर्मसभा में साध्वीश्री चन्द्र प्रभा म.सा ने कहा कि चातुर्मासिक प्रवेश कोई सामान्य बात नहीं है। लोगों में ज्ञान, ध्यान, संयम व सद्भाव को बढ़ाने के लिए मुनि व साध्वियों का चातुर्मासिक प्रवेश जरूरी है। चातुर्मास के दौरान श्रावक-श्राविकाएं धर्म, ध्यान, तपस्या, साधना, आराधना तथा भक्ति के साथ आपसी सद्भाव व भाईचारे को बढ़ावा दें। बीकानेर धर्मनगरी है यहां अतीत से अब तक अनेक चरित्रा आत्माओं ने धर्म, आध्यात्म व संयम को अंगीकार मरुधरा का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि चातुर्मास के दौरान राग भाव, अहंकार व अभ्मिान का त्याग कर सादगी, सहजता व सरलता से जैन शासन के गौरव को बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि बच्चों को नियमित व संयमित रखने के लिए उत्तम संस्कार दें। वर्तमान में संस्कारों में विकार व विकृति अधिक नजर आ रही है तथा संस्कृति गायब हो रही है। लोगों में धर्म व संस्कार के लिए मुनि व साध्वीवृंद का चातुर्मास होता है। पूर्व में साध्वीजी म.सा. ने मंगलाचरण किया। साध्वी चंदन बाला ने भी प्रवचन किए। समारोह में सुश्री गंूजन व टिवंकल ने योग तथा पांच महाव्रतों की प्रतिष्ठा करने वाला संवाद पेश किया। विक्षण महिला मंडल ने मूला बाई के नेतृत्व में भजन पेश किए। सुश्री गुंजन ने भक्ति गीत पर नृत्य किया। सुश्री सरोज कोचर ने साध्वीजी का परिचय दिया तथा चातुर्मास का महत्व बताया। सुश्री कोचर ने कहा कि धर्म नगरी बीकानेर में साध्वीजी के चातुर्मास से सभी को आध्यात्मक की प्रखर ज्योति, परम पूज्य गुरुवर्या श्रीजी द्वारा ज्ञान, दर्शन चारित्रा की त्रिवेणी में अवगाहन द्वारा अध्यात्म, धर्म, संस्कृति के संरक्षण, संवर्द्धन पूर्व आत्म मंथन करने का अनुपम अवसर मिलेगा। इनका हुआ सम्मान
सभा में साध्वी चन्द्र प्रभा म.सा. का अंजू मुसरफ, कमला खजांची व बरडि़या ने कम्बली ओढ़ाकर सम्मान किया। समारोह में शामिल हुए जयपुर खरतरगच्छ संघ के संयुक्त मंत्री राजेन्द्र बोहरा, कोटा के विमल चंद धारीवाल, अजीज चंडालिया, जैन महासभा कोलकाता के रूपचंद सावनसुखा, जीतो के फाउंडर सदस्य व महावीर इंटरनेशनल दिल्ली के गजराज सिंघी, फलौदी के योगीराज बच्छावत, नागेश्वर के गेवरचंद बांठिया, कंपिल (उ.प्र.) तीर्थ के ट्रस्टी पुखराज डागा का चातुर्मास व्यवस्था समिति के संयोजक ओम सुराणा, गेवर चंद मुसरफ, सुगनजी महाराज का उपासरा ट्रस्ट के अध्यक्ष रायसिंह खजांची, मंत्री रतन लाल नाहटा, सहित अनेक पदाधिकारियों ने अभिनंदन किया।
दादा गुरुदेव की पुण्यतिथि 30 को
चातुर्मास व्यवस्था समिति के संयोजक गेवर चंद मुसरफ ने बताया कि चातुर्मास के दौरान विभिन्न कार्यक्रम होंगे। 30 जून शनिवार को दादा गुरुदेव जिनदत्त सूरीश्वर की 858 वीं पुण्यतिथि पर सुबह नौ बजे गुणानुवाद सभा, दोपहर दो बजे दादा गुरुदेव पूजन, शाम आठ बजे सामूहिक एकतीसा पाठ होगा। चातुर्मास के कार्यक्रम 3 जुलाई मंगलवार को प्रारंभ होंगे। चातुर्मास के दौरान चातुर्मासिक प्रतिक्रमण, सामूहिक सामयिक अभियान व मास क्षमण तप प्रारंभ होंगे। साध्वीजी के सान्निध्य में 11 से 13 जुलाई तक भगवान पाश्र्वनाथ के सामूहिक अट्ठम व सस्वर नवंकार महामंत्रा का तीन दिवसीय अखंड जाप का आयोजन होगा। चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन सुबह नौ से दस बजे तक रांगड़ी चैक के सुगनजी महाराज के उपासरे में प्रवचन, प्रति रविवार एकासना एवं अनेक विध ज्ञानवर्द्धक प्रतियोगिता व प्रश्न मंच, ज्ञान पिपासुओं के लिए प्रतिदिन दोपहर में दो बजे स्वाध्याय, ज्ञान भक्ति व क्रियाशुद्धि का विशिष्ट प्रशिक्षण, प्रति रविवार सामूहिक परमात्म पूजा एवं बाल व प्रौढ़ संस्कार शिविर, सामूहिक अट्ठम, अट्ठाई, मास क्षमण, मोक्षदंड, कण्ठाभरण एवं गौत्तम कमल तप आदि विविध अनुष्ठान, पापों के प्रक्षालन के लिए भव आलोयणा का विशिष्ट अनुष्ठान होंगे।
|