Sunday, 17 February 2019
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राजस्थानी, भोजपुरी, भोटी भाषा से जुडे सौ सांसद मान्यता के लिए तैयार : मेघवाल

राजस्थानी भाषा की मान्यता पर एक राज्यस्तरीय वैचारिक मंथन का आयोजन

बीकानेर, राजस्थानी युवा लेखक संघ और राजस्थानी भाषा मान्यता समिति के संयुक्त तत्वावधान में राजस्थानी भाषा की मान्यता पर एक राज्यस्तरीय वैचारिक मंथन का आयोजन स्थानीय नरेन्द्रसिंह ऑडिटॉरियम में रखा गया जिसमें बीकानेर के सांसद अर्जुनराम मेघवाल ने कहा कि राजस्थानी को संवैधानिक मान्यता शीघ्र मिलने की सम्भावना है । देश की तीन प्रमुख भाषाओं के जिसमें राजस्थानी, भोजपुरी भोटी भाषा से जुडे सौ से अधिक सांसद मान्यता के लिए तैयार हो रहे हैं और सांसदों का शिष्मंडल शीघ्र इस बाबत प्रधान मंत्री से मिलेगा । इस अवसर पर उन्होंने मान्यता आन्दोलन में बीकानेर की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि अब हमें इस बाबत सोशल मीडिया का अधिकाधिक उपयोग करना चाहिए ।  पूर्व महापौर भवानीशंकर शर्मा ने कहा कि राजस्थान विधानसभा द्वारा पारित संकल्प के बाद भाषायी एकरूपता और अन्य भ्रामक सवालों का निपटारा हो चुका है । शर्मा ने आगे कहा कि यहाँ सौभाग्य है कि बीकानेर की धरा से फलाफूला अहिंसात्मक मान्यता आन्दोलन आज परवान चढा है । कार्यक्रम संयोजक एवं राजस्थानी मान्यता आन्दोलन प्रवर्तक कमल रंगा ने कहा कि बीकानेर से प्रारम्भ हुआ अहिंसात्मक आन्दोलन अपने आप में पूरे विश्व में अनूठा है । मान्यता उपरांत हमें दूसरी राजभाषा के लिए संघर्ष करना होगा ताकि भाषा रोटी रोजी से जुडे ।

विषय प्रवर्तन करते हुए पत्रकार, रंगकर्मी मधु आचार्य “आशावादी” ने कहा कि पूर्व की भांति मांन्यता की परवान चढी बात कहीं लम्बित नहीं रह जाए इसके लिए हमें सचेत रहना होगा और साथ ही हमें हमारा हक मिलता है तो मान्यता उपरांत सभी चुनोतियों का सामना करना होगा । राजस्थानी मान्यता समिति के अध्यक्ष के.सी.मालू ने कहा कि समिति के अधिक से अधिक सदस्य बनें ताकि जन जुडाव हो सके । मान्यता समिति के संरक्षक अमरसिंह राठौड ने कहा कि राजस्थानी भाषा की मान्यता का श्रेय बीकानेर के नाम रहेगा । समिति के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष भरत ओळा ने कहा कि गांव-गांव ढाणी-ढाणी तक मान्यता की बात पहुंचाने के लिए जन आन्दोलन में तेजी लायी जाएगी । उन्होंने आज के कार्यक्रम को ऐतिहासिक कार्यक्रम बताया ।

राज्यस्तरीय वैचारिक मंथन में पत्रकार अशोक माथुर ने कहा कि बीकानेर के साहित्यकारों और राजस्थानी समर्थकों ने आन्दोलन को आगे बढाया है । कर्मचारी नेता अविनाश व्यास ने कहा कि हमें अपने घर परिवार से होते हुए समाज तक भाषा को व्यवहार में लाना होगा । बीकानेर व्यापार उध्योग मंडल के सचिव कन्हैयालाल बोथरा ने कहा कि देश और विदेश के महान विध्वानों द्वारा राजस्थानी को समृद्ध भाषा बताया है । बीकानेर बार के पूर्व अध्यक्ष अजय पुरोहित ने कहा कि नई पीढी को हमें भाषायी संस्कार देने होंगे वहीं राजस्थानी में पाठ्यक्रम तैयार करना चाहिए । आचार्य तुलसी शोध प्रतिष्ठान के लूणकरण छाजेड ने कहा कि मान्यता उपरांत चुनोतियों के लिए चिंता नहीं चिंतन की जरूरत है । श्रमिक नेता हेमंत किराडू ने कहा कि राजनैतिक प्रयास जरुर रंग लाएगा । साथ ही हमें बीकानेर के आन्दोलन की भूमिका को नहीं भूलना चाहिए ।

कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी के नेता नारायण दास रंगा ने कहा कि हमें सामूहिक प्रयास करने चाहिए जिसके लिए बीकानेर में स्वस्थ वातावरण है । बीकानेर लघु व्यापार मंडल के अध्यक्ष आनन्द गुप्ता ने कहा कि भारतीय भाषाएं लुप्त हो रही है ऐसे में हमें सचेत रहना होगा । महावीर इंटरनेशनल के महेन्द्र जैन ने कहा कि राजस्थानी भाषा वैज्ञानिक द्दृष्टि से सम्पन्न है । सिन्धी भाषा के प्रतिनिधि सुरेश हिन्दुस्तानी ने कहा कि सिन्धी भाषा के लोग राजस्थानी का भरपूर समर्थन करते हैं साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि राजस्थानी को प्राथमिक शिक्षा से प्रारम्भ किया जाए । उर्दू भाषा के प्रतिनिधि कासिम बीकानेरी ने कहा कि उर्दू जुबान के लोगों ने हमेशा राजस्थानी का समर्थन किया है और आम बोलचाल में भी राजस्थानी का प्रयोग करते हैं । करुणा क्लब के जतन दुग़्ग़ड ने कहा कि हमें हर स्तर पर छोटे-छोटे प्रयास करने होंगे । पेंशनर समाज के अनवर उस्ता ने कहा कि आन्दोलन को जन आन्दोलन बनाने की जरुरत है । खेल क्षेत्र के लेखक आत्माराम भाटी ने कहा कि हमें खेल मैदान से और खिलाडियों के माध्यम से आवाज उठानी चाहिए । छात्र प्रतिनिधि प्रशांत जैन ने कहा कि छात्र मान्यता की बात पर हमेशा साथ रहेगा । शिक्षाविद गौरीशंकर प्रजापत ने कहा कि मान्यता की बात के लिए हमें एकजुट रहना होगा और उन्होंने बीकानेर की भूमिका को भी रेखांकित किया । लोजपा के जिलाध्यक्ष रमजान मुगल ने भी आन्दोलन का समर्थन किया ।

मान्यता समिति के देवकिशन राजपुरोहित और ओम पुरोहित “कागद” ने भी अपनी बात रखी । इस अवसर पर हनुमानगढ से आए अनिल जान्दू, सन्दीप महिया,धनपत स्वामी आदि ने भी मान्यता आन्दोलन का समर्थन किया । मान्यता समिति द्वारा राजस्थानी साहित्यकार शंकरसिंह राजपुरोहित को सर्वसम्मत जिलाध्यक्ष बनाने की घोषणा की ।

कार्यक्रम में डॉ. किरण नाहटा, शमीम बीकानेरी, सरदार अली पडिहार, शिवशंकर भादाणी, जब्बार बीकाणवी, जेठमल मारु,मो.शब्बीर.मो.फारुक,डॉ.मुरारी शर्मा, बी.एल. नवीन, बाबुलाल खत्री, सुरेशकुमार सोनी, भंवर्लाल रतावा, योगेन्द्र पुरोहित, डॉ. कृष्णा आचार्य, राज भारती शर्मा, जाकिर अदीब, डॉ.मदन सैनी, वली गौरी, इसरार हसन कादरी, शमशाद अली, अजय स्वामी, चोरुलाल प्रजापत, बजरंग गिरी, तुलसीराम मोदी, मोहरसिंह यादव, शक्तिप्रसन बीट्ठू, सुनील सांखला,जियाहसन कादरी,हरिशंकर पारीक,गोपाल जोशी, मोहनलाल राजपुरोहित,इंजि. सैयद कासिम अली, मोइनुदीन, कोडाराम भादू, जुगलकिशोर पुरोहित, भारती आचार्य सहित नगर के विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य लोगों ने भी राजस्थानी भाषा मान्यता का समर्थन किया । कार्यक्रम का संचालन युवा पत्रकार हरीश बी. शर्मा ने किया । आभार प्रदर्शन रंगकर्मी सुनीलम ने ज्ञापित किया ।

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