Thursday, 14 December 2017

देर रात तक जारी है रम्मतों का अभ्यास

युवा व बच्चे भी अभ्यास मे शामिल

बीकानेर,  परम्पराओं के शहर बीकानेर मे होली के अवसरों होने वाली रम्मतों का अभ्यास परवान पर है। अपनी ही मस्ती और आलम मे जीने वाले यहाँ के संस्कृतिधर्मी वरिष्ठजन जहाँ खुद अभ्यास कर रहे है वहीं आने वाली पीढी भी जन जुडाव के इस नाट्य कौशल मे तैयार हो रही है। 
 
बिस्सों के चौक में होने वाली शहजादी नौटकी, आचार्यों के चौक में होने वाली वीर रस से  भरी अमरसिंह राठौड रम्मत, बारह गुवाड चौक में होने वाली हैडाउ मेरी व स्वांग मेरी सहित किकाणी व्यासों के चौक में होने वाली जमनादास कल्ला की रम्मत का अभ्यास रम्मत के कलाकारों द्वारा किया जा रहा है। 
 
देर रात तक अपने अपने अखाडों में ये कलाकार रम्मत के कथानक का अभ्यास करते हैं और रम्मत में गाये जाने वाले ख्याल, लावणी चौमासों के लयबद्ध गायन का अभ्यास करते हैं।
इस अभ्यास के दौरान नई पीढी के साथ युवा पीढी भी जुडी हुई है और ये युवा व बच्चे भी पूरी मेहनत व शिद्दत के साथ इस अभ्यास में साथ है। 
 
परम्पराओ से गहरे जुडे इन लोगो का उत्साह देखते ही बनता और इसका एक उदाहरण हमें बीकानेर में आयोजित होने वाली रम्मतों के अभ्यास के दौरान स्पष्ट देखने को मिला।
 
 
बिस्सों के चौक में होने वाली रम्मत में अभ्यास के दौरान तीन चार छोटे बच्चों को भी अभ्यास करते हुए देखा। इन बच्चों से बात करने पर उन्होने उत्साह से बताया कि हम अपने परिवार की परम्परा को आगे ले जाना चाहते हैं और इस बार वे भी रम्मत में अपने अपने किरदार अदा करेंगें।
 
बच्चों को अभ्यास करते हुए देखने पर यह स्पष्ट लगा कि इन बच्चों ने कथानक के संवादों को रटने में बडी मेहनत की है और ये दिल से यह काम कर रहे हैं।
 
प्रतिदिन स्कूल जाने वाले और अपने दोस्तों के साथ बचपन के खेल खेलने वाले इन बच्चों के मन में अपनी परम्परा को लेकर गौरव है और सम्मान है और इस रम्मत के माध्यम से ये बच्चे इसी सम्मान और गौरव को आगे की पीढी तक ले जाने का काम कर रहे हैं। कला नाट्य विद्या के जरिए सामाजिक सरोकारों की परम्पराओं से प्रभावित इन बच्चों के संवाद बोलने का अंदाज और लयबद्धता देखते ही बनती है। 
 

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