Monday, 21 September 2020
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देश, देस और राष्ट्रवाद: हिन्दूस्तानियत पर कुछ प्रशन

बीकानेर गौरव सम्मान मालचंद तिवाड़ी को

देश, देस और राष्ट्रवाद: हिन्दूस्तानियत पर कुछ प्रशन

बीकानेर। अजित फाउण्डेशन के वार्षिक दिवस पर आयोजित संवाद श्रृंखला में ‘‘देश, देस और राष्ट्रवाद: हिन्दूस्तानियत पर कुछ प्रश्न’’ विषय पर बोलते हुए आदित्य निगम ने कहा कि जब हम बचपन में थे तब शहर से गांव जाते थे उसको हम देस जाना कहते थे लेकिन पिछले 10-15 सालों में देश और देस दो शब्दों का उपयोग लिया जाने लगा जोकि एक नई राय को पैदा करता है। दूसरी ओर राष्ट्रवाद शब्द जिसका उदय 18वीं शताब्दी के उतरार्द्ध और 19 वीं शताब्दी के पहले वर्षों प्रचलित हुआ। इस राष्ट्रवाद में सभी को बराबरी का हक की बात हुई। एक पक्ष यह भी है कि राष्ट्र स्वतः वजूद में आई है हुई चीज नहीं है उसको गढ़ा गया है। इसके साथ-साथ हम जितना इतिहास के दर्द को कुरेदते रहेंगे तब तक हम राष्ट्र को नहीं स्थापित कर पायेंगे। 
 उन्होंने अपने भाषण में कहा कि सन् 1881 की जनगणना के बाद लोगो में यह प्रचारित हुआ कि भारत विविधताओं को देश है क्योंकि इस जनगणना के बाद ही जातिगत हिन्दू और मुसलमान लोगो की गिनती आरम्भ हो गई जिससे राजनीति मंे एक नया मोड़ आया। उन्होंने इतिहास कि ओर इशारा करते हुए कहा कि शोद्यार्थियों ने मोर्य काल एवं गुप्तकाल आदि के बारे में कई नये पहलूओं को जोड़ जोकि आज हम काफी बार पढ़ते है। वर्तमान परिदृश्य पर अपनी बात रखते हुए कहा कि आज राष्ट्रवाद की स्थिति कोई ज्यादा अच्छी नजर नहीं आ रही है। इसके लिए हमें सोचना होगा।
 कार्यक्रम में राष्ट्र ख्याति प्राप्त साहित्यकार मालचंद तिवाड़ी को उनके साहित्यिक अवदान हेतु प्रो. विजयशंकर व्यास एवं श्रीमती लक्ष्मी देवी व्यास के कर कमलों द्वारा ‘‘बीकानेर गौरव सम्मान’’ से नवाजा गया। इस अवसर पर तिवाड़ी ने संस्था के प्रति आभार जताते हुए कहा कि साहित्य की सेवा हेतु काफी सम्मान मिलता रहा है लेकिन अपने शहर में सम्मान प्राप्त होना बहुत ही आनन्दमय लगता है। उन्होंने राष्ट्रवाद पर अपनी बात रखते हुए बीकानेर को एक राष्ट्र की उपमा दी। अगले चरण संस्था की पूर्व सचिव डाॅ. ज्योत्सना राजवंशी का सम्मान किया गया। संस्था के कार्यक्रम समन्वयक संजय श्रीमाली को उनके संस्थानिक योगदान हेतु सम्मानित किया गया। 
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पद्मभूषण प्रो. विजयशंकर व्यास ने कहा कि आज का संवाद बहुत ही ज्वलंत मुद्दे पर था लेकिन आदित्य निगम ने बहुत ही सरल भाषा में अपने विचार रखे। व्यास ने कहा कि राष्ट्र व्यक्ति की पहचान होती है, जिसे हमें मानना चाहिए। उन्होंने कहा कि सोशल मिडिया एवं तकनीकी के बढ़ते प्रचार-प्रसार से अब गांव एवं शहर की दूरी सिमट गई है। साथ ही दलित एवं गरीब वर्ग भी अब चाहता है कि वह तेजी से विकास की धारा में जुड़े।
कार्यक्रम के अंत में भजन संध्या का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सुप्रसिद्ध भजन गायक शंकर व्यास ने अपने भजनो से सभी श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। साथ ही विख्यात तबलावादक नवल किशोर श्रीमाली ने तबले पर संगत कर महफिल को उम्दा कर दिया।     कार्यक्रम का मंच संचालन स्वरूप सिंह राजपुरोहित ने किया। 

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