Monday, 23 October 2017

शहर की शान को बचाने की मुहिम शुरू

 डूंगरपुर,  शहर की शान ऐतिहासिक गेपसागर झील को बचाने की प्रशासन की मुहिम अब धीरे-धीरे मूर्त रूप लेती जा रही है। झील संरक्षण के लिए राष्ट्रीय झील संरक्षण कार्यक्रम के तहत समन्वित एवं सार्थक कार्यवाही के लिए जिला कलक्टर पूर्ण चंद्र किशन की अध्यक्षता में ‘गेपसागर झील संरक्षण समिति’ का गठन किया है। समिति के सदस्य सचिव एवं अतिरिक्त जिला कलक्टर टी.सी. बोहरा ने बताया कि समिति में अधिकारीगण, जनप्रतिनिधि, स्वयंसेवी संस्थाएं एवं प्रबुद्घ नागरिकों को सम्मिलित करते हुए कुल 30 सदस्य बनाए गए है। इसमें जिला पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त जिला पुलिस अधीक्षक, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, डूंगरपुर उपखण्ड अधिकारी, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग खण्ड डूंगरपुर के अधिशासी अभियंता, डूंगरपुर तहसीलदार, नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी, डूंगरपुर पंचायत समिति के विकास अधिकारी, राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उदयपुर के क्षेत्रीय अधिकारी, जिला जनसंफ अधिकारी, वरिष्ठ नगर नियोजन कार्यालय उदयपुर के उप नगर नियोजक को सदस्य बनाया गया है वहीं जनप्रतिनिधियों में डूंगरपुर-बांसवाडा सांसद, डूंगरपुर विधायक, नगरपालिकाध्यक्ष डूंगरपुर, जिला प्रमुख, डूंगरपुर प्रधान, ग्राम पंचायत बिलडी व माण्डवा के सरपंच को सदस्य नियुक्त किया गया है।इसके अलावा सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी समरसिंह, इतिहासकार महेश पुरोहित, उदयविलास पेलेस के हर्षवर्धनसिंह, जिला स्तरीय बीस सूत्री कार्यक्रम समिति के उपाध्यक्ष, सिटीजन संस्थान, बार एसोसियेशन, चेम्बर ऑफ कॉमर्स तथा माईन्स ऑनर एसोसियेशन के अध्यक्षों को भी सदस्य नियुक्त किया गया है। उन्होंने बताया कि झील संरक्षण समिति की प्रतिमाह एक बैठक आयोजित की जाएगी और समिति द्वारा लिए गए निर्णयों की कार्यकारी समूह द्वारा क्रियान्विति की जाएगी।

   गेपसागर झील संरक्षण समिति द्वारा लिए गए निर्णयों को क्रियान्वित करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा एक कार्यकारी समूह का भी गठन किया गया है जिसमें अतिरिक्त जिला कलक्टर को नोडल ऑफिसर तथा डूंगरपुर उपखण्ड अधिकारी को समन्वयक बनाया गया है। । यह कार्यकारी समूह राष्ट्रीय झील संरक्षण कार्यक्रम के तहत किए जाने वाले सर्वे प्रोजेक्ट के लिए आवश्यक सुझाव देगा तथा प्रोजेक्ट रिपोर्ट की क्रियान्विति करने और मौके की समस्याओं के निराकरण के लिए कार्य करेंगे। कार्यकारी समूह की न्यूनतम एक बैठक प्रतिमाह आयोजित की जाएगी और इसके द्वारा अपना प्रतिवेदन झील संरक्षण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।