Tuesday, 24 October 2017

तीन दिवसीय कार्यशाला का समापन

बीकानेर नव निर्वाचित प्रधान, उप प्रधान और संभाग के विकास अधिकारियों की तीन दिवसीय कार्यशाला का समापन नोहर पंचायत समिति के प्रधान विशुपाल आर्य की अध्यक्षता में हुआ।  इंदिरा गांधी पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास संस्था, जयपुर और जिला परिषद बीकानेर द्वारा आयोजित कार्यशाला के अंतिम दिन गुरूवार क प्रथम सत्र में मानव अधिकारों,शिक्षा के अधिकार और हरित राजस्थान अभियान, संविधान में प्रत्येक नागरिकों के अधिकार और ग्राम पंचायत की आबादी भूमि के पट्टे जारी करने पर विषय विशेषज्ञ द्वारा प्रकाश डाला। मुख्यकार्यकारी अधिकारी बलवन्त सिंह बिश्नोई ने निर्वाचित प्रधान एवं उपप्रधानों को कार्यशाला में मिले प्रशिक्षण का लाभ आमजन तक पहुंचाने पर बल दिया और कहा कि योजनाओं की क्रियान्विति के लिए जरूरी है,प्रशिक्षण में हुए अनुभवों का उनकी कार्यशैली में दिखाई दे। मास्टर ट्रेर्नर अरविन्द औझा ने मानव अधिकारों को लागू करवाने में पंचायत राज जनप्रतिनिधियों की भूमिका को उल्लेखित किया और कहा कि ग्रामीण विकास की योजनाओं में मानवीय दृष्टिकोण पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि योजनाओं को अमलीजामा देते हुए हमें अपनी सोच जेन्डर आधारित रखनी चाहिए। योजना का लाभ महिला एवं पुरूषों को समान रूप से मिलना चाहिए। महिलाओं को बढवा देने में क्या तरीका अपनाए,यह सोचना होगा। अतिरिक्त मुख्यकार्यकारी अधिकारी हरलाल साहरण ने पंचायत राज नियम के तहत आबाद भूमि के पट्टे जारी करने,निःशुल्क व रियायती दरों पर भूखण्ड आवंटन की प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि गांवों में ऐसी शिकायतें भी मिली है कि कई पंचायतों में काफी संख्या में पट्टे तैयार कर रखे है,लेकिन जारी नहीं किए।  ऐसा नहीं होने पर ग्रामीण क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पडता है। उन्होंने प्रत्येक विकास अधिकारी से कहा कि वे नियमों को भती-भांति समझे और इस दिशा में सार्थक प्रयास करें। उन्होंने पंचायती राज नियम 157 में अधिसूचना में हुए संशोधन 152 (2) में किये प्रावधानों की विस्तार से व्याख्या की और विकास अधिकारियों के प्रश्नों का उत्तर दिया।  मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा.सोहन लाल गोदारा ने ग्रामीण क्षेत्र में प्रदत्त स्वास्थ्य सेवाओं की चर्चा की और बताया कि राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया गया है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में जनप्रतिनिधियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि स्वास्थ्य केन्द्र,आंगनबाडी केन्द्र आदि की गतिविधियों की जनप्रतिनिधि बराबर मोनिटरिंग करें।  उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र में ए.एन.एम., सहयोगिनी,आशा का स्वास्थ्य गतिविधियों में महत्वपूर्ण योगदान बताया और कहा कि आशा गांव व स्वास्थ्य विभाग के मध्य सूचना के आदान-प्रदान करने का मुख्य आधार है। अतः जनप्रतिनिधि इनके कार्यों का   मूल्यांकन करें और इनकी उपस्थिति     को प्रमाणित करें। कार्यशाला में        संभागीय मुख्यवन संरक्षक डी.पी.      शर्मा ने हरित राजस्थान अभियान की सफल क्रियान्विति में पंचायत राज जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर व्याख्यान दिया। उन्होंने वन एवं            वन्य जीवों की रक्षा के लिए बहुपयोगी सुझाव भी दिये। इस अवसर पर आपदा प्रबन्धन,जल संरक्षण,पर्यावरण संरक्षण विषय पर पावर पॉईंट आधारित प्रजन्टेशन दिया गया।