सुप्रसिद्व साहित्यकार जॉर्ज बनार्ड शॉ को एक महाशय ने भोज पर आमंत्रित किया। चूकि वह महाशय मांसाहारी थे, अतः शॉ ने उनको पहले ही बता दिया था कि वह मांसाहारी भोजन नही करेगे।
अगले दिन जब शॉ उनके यहां भोजन करने गये तो देखा कि शाकाहारी भोजन की भी व्यवस्था है। वह शाकाहारी भोजन की मेज पर रखे सलाद को चटखारे लेकर खाने लगे।
तभी एक मांसाहारी सज्जन ने उन पर व्यंग्य कसते हुए कहा,जनाब मुर्गा खाइये इस घास फूस मे रखा क्या है?
शॉ से रहा नही गया और उन्होने हाजिरजवाबी का परिचय देते हुए कहा, यह मेरा पेट है कब्रिस्तान नही।
यह सुनकर उन सज्जन से जवाब देते नही बना।
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