एकलव्य को आज स्कूल में धार्मिक स्थलों के विषय में जानकारी से वह संतुष्ट नही था। बहुत से प्रश्न उसके मन में उथल-पुथल मचाये हुये थे। इसलिये स्कूल से सीधे घर पहुंचते ही उसने मम्मी से पूछा मम्मी मंदिर में कौन रहता है?
ईश्वर रहता है। मेरा पगला बेटा पहले स्कूल बैग तो रख फिर कपडे बदलकर यह सवाल पूछना। उसने कंधे से बैग उतारते हुए कहा और मस्जिद मे कौन रहता है? मॉ सुशिक्षित थी बोली वहां अल्लाह ताला रहता है। मेरे अध्यापक ने भी यही बताया था पर गुरूद्वारा मे कौन रहता है? वहा सत श्री अकाल जी रहते है।
और चर्च? वहां ईसा मसीह रहते है। मां ने अपनी बुदिमता पर खुश होते कहा।
पर मम्मी, यह ईश्वर, अल्लाह, यीशु और अकाल पुरूष है कौन?
मॉ ने कहा बेटा यह सब एक ही भगवान के अलग अलग रूप है।
ईश्वर कोई चोर डाकू या लुटेरा थोडे ही जो उसे पुलिस के डर से अपना नाम बदलकर अलग अलग स्थानो पर छुपना पड रहा है। मेरी तो समझ मे तो कुछ नही आ रहा है मम्मी? उसने गर्दन झटकते हुए कहा।
मां चुपचाप एकलव्य के मुंह को देखती रह गई।
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