Sunday, 26 September 2021

KhabarExpress.com : Local To Global News
  2715 view   Add Comment

वृक्षारोपण हेतु 17 हजार करोड रूपये

जयपुर।  वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री रामलाल जाट ने राज्य के लगभग 44 हजार वर्ग कि.मी. क्षेत्र में वृक्षारोपण हेतु भारत सरकार से 17 हजार करोड रूपये की मांग की है। उन्होंने विभिन्न परियोजनाओं में वृक्षारोपण हेतु राष्ट्रीय वनीकरण योजना के अन्तर्गत भी वन विकास अभिकरणों के लिये राजस्थान  को अधिक से अधिक राशि उपलब्ध कराए जाने का आग्रह किया है।  नई दिल्ली के विज्ञान भवन में मंगलवार को आयोजित राज्यों के वन एवं पर्यावरण मंत्रियों की बैठक में राज्य के वन एवं पर्यावरण मंत्री जाट ने राजस्थान में क्षेत्रीय वन्य जीव अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान खोले जाने हेतु भी विशेष रूप से मांग रखी। उन्होंने कहा कि इसके लिये राज्य सरकार जमीन उपलब्ध करवाने को तयार है। भारत सरकार इस हेतु वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाये। राज्य में विलुप्ति के कगार पर जा पहुंचे गोडावण पक्षी को बचाने के लिए प्रोजेक्ट टाईगर की तर्ज पर प्रदेश में प्रोजेक्ट बस्टर्ड चलाए जाने की भी उन्होंने केन्द्र सरकार से मांग रखी। जाट ने बैठक में कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता राज्य में बेहतर पारिस्थितिकी तंत्र की स्थापना है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के अधिकाधिक भू-भाग को वनाच्छादित करने हेतु ही राज्य के मुख्यमंत्री गहलोत  की पहल पर हरित राजस्थान कार्यक्रम की शुरुआत की गयी है। इसे अगले 5 वर्षों तक निरंतर एक दीर्घावधि कार्यक्रम के रूप में चलाया जावेगा। जाट ने बैठक में कहा कि वन संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत आवासीय प्रयोजन हेतु कच्ची बस्तियों के नियमतीकरण के लिए वन भूमि प्रत्यावर्तन के लिए वन संरक्षण अधिनियम, 1980 में वर्तमान में प्रावधान नही हैं। इस समस्या के समाधान हेतु केन्द्र सरकार द्वारा समुचित शर्तों के अध्याधीन ऐसे वन क्षेत्र को प्रत्यावर्तित करने के संबंध में सरलीकृत प्रक्रिया निर्धारित की जानी चाहिये। उन्होंने भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को डाइवर्जन की स्वीकृति देते समय वृक्षारोपण की आवश्यकता अनुसार समस्त राष्ट्रीय राजमार्गों के दोनों तरफ कम से कम तीन-तीन कतारों में सघन वृक्षारोपण करने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण पर बाध्यकारी शर्तं लगाने का प्रावधान किए जाने हेतु भी जोर दिया। जाट ने कहा कि भारत सरकार द्वारा संरक्षित क्षेत्रों की वार्षिक कार्य योजनायें अनुमोदन के पश्चात् राशि उपलब्ध होने में साधारणतया प्रतिवर्ष अगस्त-सितम्बर का समय आ जाता है। ऐसी स्थिति में माह अप्रैल से जून की अवधि में वन्य जीवों के लिये पीने के पानी की व्यवस्था एवं अग्नि दुर्घटनाओं से निपटने के लिये राशि के अभाव में कठिनाई महसूस की जाती है। वर्षा ऋतु के प्रारम्भ में खरपतवार हटाने में भी इससे विलम्ब और व्यवधान होता है। अतः भारत सरकार को पूर्व वर्ष की वार्षिक कार्य योजना की कम से कम 25 प्रतिशत राशि के बराबर राशि माह अप्रैल में ही आवंटित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इससे वार्षिक कार्य योजना की पूर्ण राशि का उपयोग भी सम्भव हो सकेगा। जाट ने संरक्षित क्षेत्रों एवं वन्य जीव बहुल  क्षेत्रों के आसपास जंगली सुअरों, हिरणों एवं अन्य वन्य जीवों द्वारा कृषकों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाए जाने की चर्चा करते हुए कहा कि इस हेतु कृषकों को समुचित मुआवजे का प्रावधान किया जाना चाहिए। उन्होंने संरक्षित क्षेत्रों में शिकारियों से लडने के लिए फ्रन्टलाईन स्टाफ के आधुनिकीकरण हेतु भी अतिरिक्त वित्तीय राशि उपलब्ध कराने की मांग रखी।  बैठक में वन एवं पर्यावरण विभाग के प्रमुख शासन सचिव बी.एल. आर्य, प्रधान मुख्य वन संरक्षक अभिजीत घोष ने भी भाग लिया।

Tag

Share this news

Post your comment