Saturday, 16 October 2021

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घेवर की खुश्बु से महकी मरूनगरी

मकर संक्राति के लिए घेवरो का निर्माण बडे स्तर पर

बीकानेर, सनातन धर्म की मान्यता के अनुसार मकर संक्राति पर्व के अवसर पर दान-पुण्य की परम्परा के चलते मरूशहर बीकानेर में मैदा व चीनी से बने घेवरो का निर्माण बडे स्तर पर जारी है। मकर संक्राति पर घेवरो की बडी खपत के चलते शहर में विभिन्न स्थानो पर 100 से अधिक दुकान घेवर निर्माण की लग चुकी है। जिनमे सुबह से देर रात्रि तक घेवरो का निर्माण हलवाईयो द्वारा किया जा रहा है। घेवरो के निर्माण के साथ-साथ इनकी बिक्री भी शुरू हो चुकी है जो  मकर संक्राति के दिन परवान पर रहेगी। घेवर निर्माता रूप नारायण के अनुसार मकर संक्राति के अवसर पर घेवरो की बिक्री को देखते हुए म्विंटलो मैदे से बने घेवरो का स्टॉक कर लिया गया हैं। मांग के अनुरूप मीठे व बिना चीनी के घेवर बेचे जा रहे हैं। 

देशी व वनस्पति घी में उपलब्ध 
मकर संक्राति के लिए घेवर निर्माताओ द्वारा घी एवं वनस्पति की दोनो से घेवर बनाऐ जा रहे है। वनस्पति घी के घेवर जहां। 130 से 160 रूपये प्रति किलो मिल रहे है वही देशी घी से बने घेवर 250 से 300 रूपये प्रति किलो। जहां कुछ दुकाने दोनो ही प्रकार के घी से बने घेवर विक्रय कर रहे है वही कुछ अलग-अलग भी। 

सादा, पनीर व रबडी घेवर की मांग 
मकर संक्रांति के लिए बन रहे घेवरो में जहां दान-पुण्य के लिए केवल मैदा से बने घेवरो की अधिक मांग बनी हुई है। वही घर-परिवार में खाने के लिए दूध से बने पनीर घेवर तथा रबडी घेवर पसंदीदा बने हुए हैं। 

चार ईंच से बीस ईंच साईज तक उपलब्ध 
मैदा, दूध, चीनी व रबडी से बने घेवर विभिन्न साईजो में उपलब्ध हैं। घेवर हलवाई अन्नाराम के अनुसार सबसे छोटा घेवर चार ईंच व सबसे बडा घेवर 20 ईंच साईज तक में उपलब्ध है। छोटे साईज के घेवर जहां घर परिवार में खाने के लिए अधिक पसंद किये जा रहे है वही बडे साईज के घेवर दान-पुण्य में दिये जाते है। 

देश के विभिन्न स्थानो में मांग 
बीकानेर में निर्मित घेवरो की प्रदेश ही नही देश के विभिन्न प्रातो में मांग रहती है। जयपुर, जोधपुर, जैसलमेर, दिल्ली, कलकत्ता, मद्रास, पूना सहित विभिन्न स्थनो पर रह रहे राजस्थानी बीकानेरी घेवरो के शौकीन है। मकर संक्राति के अवसर पर वे अवश्य रूप से अपने रिश्तेदारो या परिचितो के माध्यम से घेवर की मांग कर मंगावते हैं। 

दान-पुण्य का विशेष महत्व
मरू शहर बीकानेर में मकर संक्राति के अवसर पर बहन, बेटियो, गुरूजनो, मंदिरो में घेवर दान-पुण्य का विशेष महत्व है। जिसके चलते बहन-बेटियो को अवश्य रूप से 5, 11 या 21 की संख्या में घेवर भेजे जाते है। वही महिलाओ द्वारा मकर संक्राति के अवसर पर तेरूण्डा में भी 13 घेवरो का दान किया जाता है।

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