Saturday, 16 October 2021

KhabarExpress.com : Local To Global News
  4416 view   Add Comment

नोखा में जल पर ब्लॉक स्तरीय कार्यशाला का आयोजन

जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग विशेषज्ञों द्वारा राज्य जल नीति पर श्रोताओं को विस्तार से बताया गया

बीकानेर,  राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के तहत सीसीडीयू, राज्य जल एवं स्वच्छता मिशन एवं जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग बीकानेर द्वारा राज्य जल नीति विषय पर एक ब्लॉक स्तरीय कार्यशाला का आयोजन नोखा ब्लॉक में नोखा पंचायत समिति सभागार में किया गया। इस कार्यशाला में बोलते हुए जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के सहायक अभियंता शरद माथुर ने कहा कि जल सीमित है और जल की बचत ही जल का उत्पादन है इसलिए आमजन को चाहिए कि वे जल की बचत करें।  माथुर ने जन प्रतिनिधियों को भी कहा कि वे आमजन में पानी की बचत हेतु प्रोत्साहित करें। इस कार्यशाला में वरिष्ठ भूजल वैज्ञानिक  पन्नालाल गहलोत ने राज्य जल नीति पर उपस्थित श्रोताओं को विस्तार से बताया।  गहलोत ने वर्तमान राज्य जल नीति के प्रत्येक पहलू पर चर्चा की और यह बताया कि यह  जल नीति आमजन की भलाई के लिए बनाई गई है । कार्यशाला को संबोधित करते हुए नोखा के वरिष्ठ नागरिक भंवरलाल विश्नाई ने कहा कि सरकारी कर्मचारी व अधिकारी भी अपने कर्त्तव्यों का निर्वहन सही ढंग से करें। विश्नोई ने उपस्थित जलदाय विभाग के अधिकारियों से कहा कि वे जल की छीजत को रोंके और सिस्टम के कारण जो जल का अपव्यय हो रहा है उसको रोकने का प्रयास कर।  भंवरलाल विश्नोई ने उपस्थित समुदाय को भी कहा कि आमजन भी अपनी दिन प्रतिदिन की आदतों में सुधार करें और जल बचत के प्रति अपनी मानसिकता बनाए। विश्नोई ने कहा कि जब आमजन व अधिकारी व कर्मचारी वर्ग व समाज का हर वर्ग मिलकर प्रयास करें तो जल की बचत की जा सकती है। इस अवसर पर पंचायत समिति के प्रगति प्रसार अधिकारी मिर्जा रहमान ने कहा कि संसार में जल की काफी मात्रा है लेकिन पेयजल की मात्रा उपलब्ध जल के सिर्फ एक प्रतिशत ही है इसलिए हमें चाहिए कि हम जल के प्रति स्वामित्व की भावना का विकास करें और जल बचत की आदत को जीवन में अपनाऍं।

इस कार्यशाला में परम्परागत जल स्रोतों के संरक्षण, जल के बार बार प्रयोग व आदतों में सुधार द्वारा जल बचत की बात सामने आई। उपस्थित सभी लोगों का मानना था कि पश्चिमी राजस्थान के इस क्षेत्र में जल की अनुपलब्धता हमेशा से ही रही है परन्तु परम्परागत जल संरक्षण की पद्धतियों के चलते पानी की कमी का कभी सामना नहीं करना पडा। इसलिए अगर परम्परागत जल संरक्षण की पद्धतियों को अपनाया जाए तो आने वाले समय में जल संकट की स्थिति पदा नहंी होगी। 

इस कार्यशाला में एनआरडीडब्लूपी के एचआरडी सलाहकार नवीन सारस्वत व भूजल वैज्ञानिक मनोज पंवार, पीएचईडी के सहायक अभियंता सुशील कुमार कश्यप, नरेगा की ब्लॉक कार्यक्रम अधिकारी पुष्पलता खान, नोखा पंचायत समिति के विभिन्न गाँवों के सरपंच व ग्राम सेवक सहित विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन एनआरडीडब्ल्यूपी के आईईसी सलाहकार श्याम नारायण रंगा ने किया।

State Water Policy Conference held at Nokha, Bikaner

 

Tag

Share this news

Post your comment