Saturday, 16 January 2021

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'माई त बस माई बाडी' रिलीज होगी 24 अप्रेल को

मुंबई व बिहार में अपनी सफलता का परचम फहराने के बाद जी.पी. सिप्पी द्वारा प्रस्तुत की गई पहली भोजपुरी फिल्म माई त बस माई बाडी  अब शेष भारत यानी उत्तरप्रदेश , दिल्ली , पंजाब इत्यादि शहरों में दर्शकों का दिल जीतने के लिए 24 अप्रेल को रिलीज होने जा रही है ।

Nagma And Ravikissan in Bhojpuri film ' Mai to bas Mai badi ' रविकिशन,  नगमा, कुनालसिंह,  रीटा भादुडी , उपासना सिंह , शीला शर्मा , विजय खरे , गोपाल राय , प्रवीण सिंह सिसोदिया आदि कलाकारों द्वारा चमचमाती इस फिल्म के टाइटल से यह तो जाहिर हो जाता है कि इसमें माँ की ममता की बात को प्रस्तुत किया गया है । माँ व बेटे के प्यार की कहानी को  प्रस्तुत करती इस फिल्म की खास बात यह है कि यह पूर्ण रुप से पारिवारिक फिल्म है और भारतीय संस्कृति के दर्पण के समान है । भारतीय फिल्मों का इतिहास गवाह है कि जब कभी भी माँ की भूमिका को केन्द्र में रख कर फिल्म बनाई गयी है दर्शकों द्वारा इसे हाथों हाथ लिया गया है ।

 इस फिल्म में भी मां की ममता के गुणगाण पेश किये गये है और इसकी कहानी कुछ इस पकार हैः फूलपूर गाँव के भूनेश्वर तिवारी एक अमीर व सम्मानित व्यक्ति है ।अपने बेटे दीप के खातिर शीला से दुसरी शादी करते है । शीला के साथ उसकी विधवा बहन कलावती व उसका बेटा मुंडी भी प्यार करते है । कुछ दिनों बाद शीला प्रेम को जन्म देती है । शीला दीप को भी अपने बेटे की तरह प्यार करती है । पर कलावती हमेशा उसे दीप के खिलाफ भडकाती है । एक दिन दिल का दौरा पडने से भुनेश्वर की मौत हो जाती है । शीला पर दुखो का पहाड टूट पडता है । वो हिम्मत से सामना करती है । कलावती हमेशा की तरह दीप के खिलाफ जहर घोलती रहती है । मगर शीला ध्यान नहीं देती है ।

Nagma And Upasana Singh in Bhojpuri film 'Mai to bas Mai badi' दिन बितते है , बच्चे बडे होते है । दीप की शादी गीता - शीला शर्मा  से होती है । प्रेम जिद्द करके हीरो बनने मुंबई जाता है । मुंबई में उसकी मुलाकात ज्योति -नगमा  से होती है। ज्योति फिल्म लेखक सुखदेव पांडे की बेटी है । सुखदेव - विजय खरे  की दूसरी पत्नी माया - उपासना सिंह  एक लालची व महत्वाकांक्षी महिला है । वे धन कमाने के लिए कुछ भी करने को तैसार हो जाती है । प्रेम - रविकिशन को अमीर जानकर वो ज्योति की शादी प्रेम से करवा देती है और सब गाँव आते है । माया का सपना है ..वह इस शादी से दौलत कमायेगी , अमीर बन जायेगी । वह इसके लिए प्रयास भी करती है और उसके इस प्रयास में कलावती भी शामिल हो जाती है ।

दीप व गीता को चोरी के इल्जाम में घर से निकलवा देती है । ज्योति विरोध करती है पर माया के आगे वह लाचार हो जाती है । शीला को जब सचाई का पता चलता है तो उसी दिन माया, शीला को सीढी पर से धकेल देती है। शीला जिन्दा लाश बन जाती है । दोष गीता पर लगता है , जो शीला से मिलने आई थी । दीप पत्नी को दोषी मानकर त्याग करने की बात करता है पर कलावती उसे सच्चाइ्र बतलाती है । ... आगे की कहानी  जानने के लिए इंतजार किजीए फिल्म को रुपहरे परदे पर देखने का जो जल्द ही आफ नजदीक के सिनेमाघरों में 24 अप्रेल से रिलीज होने जा रही है ।

फिल्म के निर्मामा है शिवहरी फिल्मस - विठ्ठल एन.वोरा , कथा- पटकथा और निर्देशन दयानन्द राजन , संगीत आनन्द -मिलीन्द का ।
प्रस्तुतिः राजकुमार

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