Thursday, 29 October 2020

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अर्द्धशुष्क क्षेत्रों के लिए उपयोगी बीजों का होगा परीक्षण

इक्रीसेट और एसकेआरएयू के बीच हुआ एमओयू, क्षेत्रीय अनुसंधान व विस्तार सलाहकार समिति की बैठक आयोजित

अर्द्धशुष्क क्षेत्रों के लिए उपयोगी बीजों का होगा परीक्षण

बीकानेर, 18 सितम्बर। इंटरनेशनल क्राॅप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फोर द सेमी-एरिड ट्राॅपिक्स (इक्रीसेट) द्वारा विकसित गुणवत्तायुक्त बीजों का बीकानेर एवं आसपास के क्षेत्र में उपयोगिता के दृष्टिकोण से परीक्षण किया जाएगा। परीक्षण उपरांत सर्वश्रेष्ठ पाई जाने वाली किस्मों का लाभ किसानों को मिल सकेगा।
स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय तथा इक्रीसेट के बीच इस संबंध में करार (एमओयू) हुआ है। एमओयू की यह कार्यवाही आॅनलाइन माध्यम पर हुई। एमओयू पर इक्रीसेट की महाप्रबंधक डाॅ. जैकलीन हग्स तथा कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह ने हस्ताक्षर किए। प्रो. सिंह ने बताया कि यह करार एक वर्ष की अवधि के लिए किया गया है। इस एमओयू के बाद इक्रीसेट द्वारा विकसित बीजों का परीक्षण बीकानेर में भी हो सकेगा। परीक्षण के दौरान यह देखा जाएगा कि इक्रीसेट द्वारा विकसित बीज बीकानेर और आसपास के क्षेत्रो के लिए अनुकूल हैं अथवा नहीं। क्षेत्र के अनुकूल पाई जाने वाली किस्मों को बढ़ावा दिया जाएगा, जिनके उपयोग से किसानों को प्रत्यक्ष लाभ होगा। उन्होंने बताया कि इक्रीसेट द्वारा कृषि अनुसंधान विशेषकर बाजरा की अंतर्राष्ट्रीय किस्मों पर सतत अनुसंधान किया जाता है। एमओयू के तहत इक्रीसेट द्वारा कृषि से संबंधी डेटा एवं प्रकाशन भी साझा किए जाएंगे तथा अनुसंधान कार्यों के लिए इक्रीसेट द्वारा राशि भी उपलब्ध करवाई जाएगी।
अनुसंधान निदेशक डाॅ. पी. एस. शेखावत ने बताया कि इक्रीसेट का मुख्यालय तेलंगाना के पतंचेरु में है। इक्रीसेट द्वारा भारत के अलावा केन्या, जिम्बाब्वे, मोजम्बिक, इथोपिया, माली और नाइजीरिया के अर्द्धशुष्क क्षेत्रों के लिए बीज विकसित किए जाते हैं। यह विश्वविद्यालय द्वारा अब तक हुए एमओयू की कड़ी में महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। 


क्षेत्रीय अनुसंधान व विस्तार सलाहकार समिति की बैठक आयोजित
बीकानेर, 18 सितम्बर। कृषि अनुसंधान केन्द्र द्वारा क्षेत्रीय अनुसंधान व विस्तार सलाहकार समिति (रबी) की बैठक शुक्रवार को आयोजित हुई। अध्यक्षता क्षेत्रीय अनुसंधान निदेशक डाॅ. एस आर. यादव ने की। मुख्य अतिथि के रूप में अनुसंधान निदेशक डाॅ. पी. एस. शेखावत मौजूद रहे। वहीं संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) डाॅ उदय भान, केन्द्रीय शुष्क अनुसंधान संस्थान के निदेशक डाॅ. एन.एस. यादव ने विशिष्ट अतिथि के रूप में भागीदारी निभाई। बैठक में विश्वविद्यालय तथा केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान व केन्द्रीय शुष्क क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक, चूरू, जैसलमेर व बीकानेर के कृषि विभाग के अधिकारी व कृषि विज्ञान केन्द्रों के प्रभारी व विषय विशेषज्ञों आदि ने भाग लिया।
इस दौरान वैज्ञानिकों ने कृषि अनुसंधान केन्द्र पर रबी 2019 में किए गए अनुसंधानों का प्रस्तुतीकरण दिया। वहीं ग्राही अनुसंधान केन्द्र (एटीसी) लूणकरणसर, कृषि विभाग के अधिकारियों व कृषि विज्ञान केन्द्रों के प्रभारियों ने रबी के दौरान किए गए कार्यों के बारे में बताया। बैठक में रबी की विभिन्न फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए कुल 7 अनुशंसाएं की गई तथा 4 तकनीकों को पुष्टिकरण हेतु ए.टी.सी., लूणकरणसर भेजा गया।

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