चौतरफा फैली गन्दगी, सार्वजनिक पार्क और देव स्थल भी नही है अछुते

प्रधानमंत्री के स्वच्छता अभियान को 9 माह होने के आए है, केन्द्र, राज्य, नगर निकायों से लेकर विभिन्न सैलेब्रिटी, स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता, संस्थाओं ने स्वच्छता अभियान को लेकर उत्साहित है।  इस कार्यक्रम समाज के विभिन्न वर्गों से लोग स्वच्छता अभियान से जुड़े हुए है वे नियमित रूप से इस पर कार्य कर रहे है, जिनमे कुछ नाम तो सीधे ही उल्लेखित किये जा सकते है जैसे मोहर सिंह यादव, लक्ष्मण मोदी, भूपेन्द्र मिढ्ढा, पुष्करणा वेलफेयर बोर्ड व अन्य सैकड़ो जो शायद सीधे रूप से लोगो के सामने नही है। 
लेकिन अब मुद्दा यह है किसी विशेष स्थल, सार्वजनिक जगहों की साफ-सफाई  को लेकर जितने फोटो कार्यक्रम हो रहे है, उतने शायद ही किसी और कार्यक्रम के फोटो हुए होंगे, लेकिन चैतरफा दिख रही गंदगी का आलम ये हो गया कहीं खत्म होती नजर ही नही आ रही है।
भारत भर मे सार्वजनिक जगहों के स्वच्छता पैरोकारों के पूरे मनोयोग से जुड़ने के बाद तो ऐसा लगता है कि नगर निकायों ने इस व्यवस्था से निजात पा ली है, और अब तो ये स्वच्छता के ये पैरोकार ही सारी सफाई कार्यों को अन्जाम दंेगें, गोय कि इनका अब यही जिन्दगी हो गई। नगर निकायों के सफाई कायदे-संसाधन व सफाईकर्मीयों की कर्मशीलता के तदोपरान्त कीये जा रहे सफाई कार्य, स्वच्छता अभियान से पहले भी कठघरें मे थे और देश के प्रधानमंत्री से लेकर स्थानीय स्तर के इन स्वच्छता पेरौकारों के जुड़ने के बाद भी वही आलम है, तो इसमे विपक्षी पार्टी द्वारा यह आरोप लगाया जाना कि ये अभियान केवल फोटो ख्ंिाचाओं अभियान है, और कुछ नही, एकदम सही लगता है।
नगर निकाय प्रंबधकों के साथ जिला प्रशासन को चाहिए कि कम से कम इस अभियान के तहत बाग-बगीचों, देवालयों, अस्पतालों और तमाम ऐसी जगह जहां बड़ी संख्या मे नागरिकों का आना जाना लगा रहता है, उनकों प्राथमिकता दें और स्वच्छता हेतु विशेष व्यवस्था करें, जिससे कि आम आदमी मे भी स्वच्छता के प्रति आकर्षण पैदा हो और सार्वजनिक जगह को गन्दा करने की प्रवृति पर रोक लगा सके।

- आनन्द आचार्य

साफ-सफाई के अभाव मे गन्दगी से अटे पड़े रतन बिहारी पार्क व मंन्दिर स्थल की कुछ तस्वीरें।


  

सभी छायाचित्र आज सोशियल एक्टिविस्ट लक्ष्मण मोदी के लिए हुए है।














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